शुक्रवार, 21 अगस्त 2020

प्रख्यात कवयित्री-समीक्षक डॉ रेखा मंडलोई की पुरुषों पर विचारणीय कविता

पुरुष गान
पुरुष ही से तो बनती है जीवन में नारी की पहचान।
क्यूं न बढ़ाए हम सब मिलकर उसकी भी शान।
नारी की महिमा का तो सब करते रहते सदा गुणगान।
महान पुरुषों के गुणों से क्यों रहते है हम सब अनजान।
मनु पुरुष न होते तो ना बनता इतना सुंदर जहान।
राम, कृष्ण, गौतम भी बने अपने काम से बहुत महान।
विवेकानन्द ने अपने विचारों से विश्व में
बड़ाई हमारी शान।
कलाम जैसे पुरुष ने दी भारत को एक नई पहचान।
शून्य दे आर्यभट्ट ने गणित का दिया विश्व को ज्ञान।
अति विशिष्ट अति शिष्ट पुरुषों का क्यों नहीं करते हम बखान।
जिसने नारी को पूजा और दिया उसे अति सम्मान।
उस पुरुष की महत्ता का भी तो कर लो थोड़ा गुणगान।
मोदीजी ने भी तो भारत की विश्व में बड़ाई है शान।
फिर क्यों दुनिया नहीं करती ऐसे पुरुषों का गुणगान।
         डॉ. रेखा मंडलोई इंदौर

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