मंगलवार, 25 अगस्त 2020

छत्तीसगढ़ के उभरते कवि नारायण प्रसाद जी भावविह्वल करती रचना#बदलाव मंच

पिताजी की सीख

पेशे से किसान हैं ।
एक बहुत अच्छा इंसान हैं  ।
पर मेरे लिए तो भगवान हैं  ।
अगर कोई पूछे मुझसे मेरा पता ।
तो मेरी  पहचान है पिता..  
इस लिए मेरे पिता जी महान है।
क्योंकि वे ना हिन्दू है,ना मुसलमान हैं ।
वो तो मेरा स्वाभिमान है ।
हँसाना मुश्किल रुलाना आसान है।
बेशकीमती उनकी  मुस्कान है ।
पिता जी ने कहा मुझसे कि
ध्यान रखना पर्दे के भी कान होते है ।
मैंने पूछा पर वो तो बेजान होते हैं  ?
उसके कैसे दो कान होते है ?
उसने कहा -बेटा अभी तू नादान है।
 बहुत चीजों से अंजान है।
ना किसी की धरती ना किसी का आसमान है ।
सब का हक समान है ।
अगर थोड़ा-सा भी ईमान है।
पिता जी आप ही मेरे  
हैं बाइबिल, गीता,कुरान  रामायण,  
मैं आपका नारायण ,नारायण .....
 कवि
नारायण प्रसाद साहू 
दुर्ग छत्तीसगढ़

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