सोमवार, 31 अगस्त 2020

कवि देवेंद्र चौधरी जी द्वारा रचित 'गज़ल'

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                       *ग़ज़ल* 

 *जलमग्न होकर बिलख रही बस्तियाँ,* 
 *अग्निसंस्कार बिन बह रही अस्थियाँ.* 

 *न   दिखायी   देते    है   कोई   रास्तें,* 
 *वाहनों  के  जगह  चल रही कस्तियाँ.* 

 *दर्द   जिसका  वही  जाने  है  जनाब,* 
 *फ़ोटो  खिंचाने   आती   है   हस्तियाँ.* 

 *छेड़ते   है  हम  प्रकृति  के  अंगों को,* 
 *आकर  आपदा  बन्द  हुयी  मस्तियाँ.* 

 *संरक्षण   करना   है  निसर्ग  का  हमे,* 
 *नही   तो  खराब  होगी परिस्थितियाँ.* 
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®© *श्री देवेंद्र चौधरी, तिरोडा* 
          जिला-गोंदिया (महाराष्ट्र)
          ता. ३१/०८/२०२० 
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