रविवार, 30 अगस्त 2020

कवयित्री सुशीला साहू "विद्या" जी द्वारा 'माँ की वंदना' विषय पर रचना

*विधा-----------मधुमालती छंद*
*विषय----------माँ की वंदना*
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*माँ ज्ञान का,  भंडार दे ,*
*विनती सुनो , माँ शारदे ।*

अम्बा तुही  , दुर्गा तुही ,
जग की सदा , तारण तुही ।
उपकार कर , निज प्यार दे ,
*विनती सुनो , माँ शारदे ।।1।।*

मैं तो करूँ , आराधना ,
पूरी करो , माँ साधना ।
माता तुही , उपहार दे ,
*विनती सुनो , माँ शारदे ।।2।।*

मैय्या  सुनो , आओ यहाँ ,
तेरे शिवा , जाऊँ कहाँ ।
तुम शक्ति हो , माँ वार दे ,
*विनती सुनो , माँ शारदे ।।3।।*

ममतामयी , शुभदायिनी ,
माँ शक्ति हे , वरदायिनी ।
अज्ञानता ,  से  तार  दे ,
*विनती सुनो , माँ शारदे ।।4।।*

आलोक का , आभास भर ,
चारों दिशा , उल्लास कर ।
हे  माँ  हमें ,   उद्धार  दे ,
*विनती सुनो , माँ शारदे ।।5।।*

*सुशीला साहू "विद्या"*
*रायगढ़ - छत्तीसगढ़*

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