शुक्रवार, 21 अगस्त 2020

विशाल चतुर्वेदी'उमेश' की मर्मस्पर्शी रचना 'यादें'

शीर्षक - तेरी याद 

तुम्हारी हर अदा मुझे भाती है ।
बस तुम आ जाओ , तुम्हारी याद बहुत आती है ।
तुम्हारी निगाहों से  घायल दरबदर फिरता हूँ मैं, 
तुम्हारे प्यार की बारिश मुझे बहुत तरसाती है ॥

तुम्हारी हसीन यादे लिए जी रहा हूँ मैं । 
तन्हाइयों के गमे अश्क पी रहा हूँ मैं । 
जो बुने थे खूबसूरत सपनें तुम्हारे साथ , 
उन्ही सपनों को फिरसे सी रहा हूँ मैं ॥ 

कब से बैठा हूँ समंदर के किनारे । 
कभी तो चमकेंगे  मेरी चाहत के सितारे । 
ये इश्क नही आसान , मैं भी जानता हूँ 
पर काट लूंगा जिन्दगी तेरी याद के सहारे ॥ 


सर्वमौलिक अधिकार सुरक्षित 
विशाल चतुर्वेदी " उमेश "
जबलपुर मध्यप्रदेश

साभार :-सच्ची बातें 

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें