रविवार, 30 अगस्त 2020

कवि सुरेंद्र सैनी बवानीवाल "उड़ता" जी द्वारा 'लिबास बदल' विषय पर सुंदर रचना

लिबास बदल... 

ख़ुश्क है सबरस मत मिठास बदल
पानी  तलाश कर  मत प्यास बदल

जिस्म को सतत धोने से क्या होगा
तेरी रूह मैली है मत लिबास बदल

खुद को जगा ले ज़माने की भीड़ में
तू  तन्हाई में है मत आभास बदल

ऐसे ना  उधेड़  रिश्तों की  ऊन को
रुई ये कीमती है मत कपास बदल

तेरा स्पर्श मुझे दिल से ख़ुशी देता है
ये छुअन लाजवाब मत मिडास' बदल 
(हर काम अच्छा करने वाला )

"उड़ता"ढूंढ सुकून मत तलाश बदल
बेशक है पतझड़ मत पलास' बदल 
(फूलों से लदा पेड़ )


स्वरचित मौलिक रचना 


द्वारा - सुरेंद्र सैनी बवानीवाल "उड़ता"
झज्जर - 124103 (हरियाणा )
संपर्क +91-9466865227
udtasonu2003@gmail.com

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