सोमवार, 31 अगस्त 2020

कवयित्री व लेखिका शालिनी कुमारी जी द्वारा 'दिग्भ्रमित करती ख्वाहिशें' विषय पर रचना

🙏मंच को नमन 🙏

विषय : दिग्भ्रमित करती ख्वाहिशें... 💐💐
विधा : लेख 

 हमारे जीवन में कई ऐसे पल आते हैं जब हमारी ख्वाहिशें.. हमारे ऊपर हावी होने लगती है | अनुभव.. जो हमें बहुत कुछ सिखाती है फिर भी हम उसे स्वीकारना नहीं चाहते.. | अपनी ख्वाहिशों की तलब हममें  इतनी हावी हो जाती है कि.. हम बहुत कुछ समझना ही नहीं चाहते | कभी-कभी हमारी ख्वाहिशें  इतनी प्रबल हो जाती है कि हम उसके पीछे भागते वक्त यह भी नहीं सोचते कि इसकी मंजिल क्या है...? 
 बस.. भागते चले जाते हैं | हम यह भी नहीं समझ पाते कि क्या सचमुच हमें इसके लिए इतना उत्तेजित होने की जरूरत हैं... | ऐसे में इंसान अपना विवेक तक खो देता है | क्या जिंदगी उन्हीं ख्वाहिशों तक सिमटी होती हैं,  जिसके लिए इंसान अपने जीवन तक की परवाह नहीं करता.. | यह हमारे जीवन की सबसे बड़ी विसंगति है... |
                   जीवन " ईश्वर "का दिया एक अनमोल तोहफा हैं, जिन्हें  संवारना  हमारा परम कर्तव्य हैं | जैसे पानी की बूँद जब नदी में होती है तब उसका अस्तित्व नहीं होता परंतु वही बूंदे जब पत्तों पर गिरती है तो मोती की तरह चमकती है | हमें भी अपने जीवन में ऐसा मुकाम हासिल करने की कोशिश करते रहना चाहिए, क्योंकि भीड़ का काम ही है.. हमारी पहचान को धूमिल करना | कोई भी ख्वाहिशें  या चाहत इतनी बड़ी नहीं होनी चाहिए, जिसके टूटने या गिरने से हम इतने आहत हो जाएं कि हमारी अपनी जिंदगी ही हमें बोझ लगने लगे | हमारी यह सोच हमारे परमात्मा की रचना को कलंकित करने जैसा है | ईश्वर ने हमें इंद्रधनुष सा  सतरंगी जीवन दिया है,  जिसमें हमें निरंतर आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए | हमें अपने लक्ष्य, जिज्ञासा और ख्वाहिशों का विस्तार करना चाहिए परन्तु उसके पाने की लालसा इतनी ज्यादा नहीं बढ़ानी चाहिए कि हमारा सर्वस्व ही खतरे में पड़ जाए ..... |
                 ख्वाहिशें.... ख्वाहिशें तो मायाजाल है, जिसमें हम जितना डूबेंगे, वह हमें उतना दिग्भ्रमित करेंगी  | इसलिए हमें सदैव अपने लक्ष्य एवं ख्वाहिशों को एक सकारात्मक सोच के साथ पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए | गौरतलब है कि परिस्थितियां कभी समस्या नहीं बनती बल्कि समस्या जीवन में तभी बनती है, जब हमें उन परिस्थितियों से निपटना नहीं आता.. | यदि हमारी सोच सकारात्मक होगी तो हम निःसंदेह लक्ष्य की प्राप्ति करेंगें  | परंतु यदि किसी कारणवश हमारी ख्वाहिशें पूरी ना हो फिर भी हमें निराशा को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए बल्कि उसे प्रेरणा स्रोत बनाकर फिर से अपनी मंजिल की तरफ कदम बढ़ाना चाहिए.. जिससे हमारा जीवन सुखमय हो सके तथा हम विषम परिस्थितियों से उबरने का अनुभव प्राप्त कर सकें.. | अगर हमें सफलता पानी है तो हमें कभी भी अपने बुरे अनुभव पर पछताना  नहीं चाहिए,  क्योंकि.. 

" नदी कभी नहीं पूछती.. समंदर अभी कितना दूर है.. 
 मुश्किलों से भाग जाना.. आसान लगता है....
 हर पहलू जिंदगी का.. इम्तिहान होता है...
 डरने वालों को मिलता नहीं.. कुछ जिंदगी में..
 लड़ने वालों के कदमों में.. सारा जहान होता है.. |"

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            "शालिनी कुमारी "
                "शिक्षिका "
           मुज़फ़्फ़रपुर (बिहार )
         
          (स्वरचित मौलिक लेख )
    
      

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