रविवार, 30 अगस्त 2020

कवयित्री रोशनी दीक्षित 'रित्री' जी द्वारा 'एक आँसू' विषय पर सुंदर रचना

विधा-कविता
विषय- आँखों के किनारे ठहरा एक आँसू
शीर्षक -एक आँसू
*
हम महफूज अपने आशियाँ में और किसी का आशियाँ ही ठह गया। 
आँखों के किनारे ठहरा एक आँसू, 
पलकों पर ही ठहर कर रह गया। 

वर्षों लगे बसाने में जिस बस्ती को, 
उसका नामों निशान भी न रह गया। 
आँखों के किनारे ठहरा एक आँसू ,
पलकों पर ही ठहर कर रह गया। 

कोई बह गया सैलाब में और
कही कोईं बूँद को तरस गया। आँखों के किनारे ठहरा एक आँसू, 
पलकों पर ही ठहर कर रह गया। 

कैसा ये मंजर, कैसा ये नज़ारा है। 
खोकर अपनी हस्ती,हर शख्स बेचारा हो गया। 
आँखों के किनारे ठहरा एक आँसू, 
पलकों पर ही ठहर कर रह गया।

बेबसी और लाचारी की इंम्तिहां तो देखो।
अनाज उगाने वाला, खुद भूखे पेट ही सो गया। 
आँखों के किनारे ठहरा एक आँसू, 
पलकों पर ही ठहर कर रह गया। 

*रोशनी दीक्षित 'रित्री' बिलासपुर छत्तीसगढ़ *

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