गुरुवार, 27 अगस्त 2020

कवि देवेंद्र चौधरी जी द्वारा 'छहर' विषय पर रचना

मेरे द्वारा निर्मित विधा *नेटलग्या* की एक रचना

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                    *छहर* 

 *शब्दों का जहर, बिलखता शहर* 
 *मच गया कहर,  क्यों आज?* 

 *गयी वह ठहर, मेरे मन की लहर* 
 *बन गजल बहर,  मेरी  धुन।* 

 *ख़ुशी का पहर, गया तिरंगा फहर* 
 *था माहौल महर,  प्रेम  का।* 

 *बहता नही नहर, हो गया घहर* 
 *बन्द दिल चहर,  हो  गया।* 

 *मैं उठता सहर, तब सुनता घहर* 
 *देख प्रेम का छहर, आजकल।* 
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 *कवि-देवेंद्र चौधरी, तिरोडा* 
        जिला-गोंदिया (महा.)
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