गुरुवार, 27 अगस्त 2020

कवि व लेखक सतीश लाखोटिया जी द्वारा 'धरती के भगवान' विषय पर आलेख

साहित्य संगम संस्थान के पटल पर प्रस्तुत किया गया, मेरा व्यंग आलेख

  *धरती के भगवान*

भगवान विष्णु शेषनाग के विशाल नरम मुलायम गद्दे पर आराम फरमाते हुए
मां लक्ष्मी से  बतियाते हुए
यह कह रहे  धरा पर साहित्य संगम संस्थान के पटल पर सरल स्वभाव की 
मेरी भक्त कलावती ने बड़ा अच्छा अनूठा विषय साहित्यकारों के सामने रखा है धरती के भगवान,
 पर सच बोलूं भाग्यवान
मुझे तो यह सोचकर ही हंसी आ रही है, हम देवताओं को भुलाकर
इंसान स्वयं से स्वयं को ही भगवान समझने लग गया है। परिवार में थोड़ा सा काम क्या कर  लिया। अपने आप को महान और घर के लिए भगवान
बोलने में लोग बिल्कुल भी नहीं चूकते हैं। थोड़ी सी मदद किसी को भी करने पर सोशल मीडिया पर अपने आप को इंसान रूपी मसीहा मसीहा बताना और वाह वाह करते हुए धरा के लोगों का समर्थन करना बड़ा ही नाटकीय सा लगता है।
पर क्या कर सकते हैं हमें तो यही कलयुग का  नाटक देखते हुए इनके पाप पुण्य  खाता अपने यहां के खाता वही में लिखना  हैं। और लक्ष्मी
धरा पर साधु संत महात्मा की तो बाढ़ सी आ गई।
कोई अपने आप को मेरा कलयुगी अवतार, कोई देवी अपने आपको 
आदिशक्ति का अवतार बता कर, आस्था के साथ खिलवाड़ करके धन ही धन बटोर रहे हैं। मैं इस बारे में आपसे नाराज हूं लक्ष्मीजी आपका ऐसे दुराचारीयों  के यहां मन ही  कैसे लगता है। यह बात मेरी समझ से परे, 
  ऊपर से आज के नेता
देखो ना कितना खुश हो रहे, मेरे ही एक रूप के मंदिर बनने पर, आचरण
सच बोलूं रावण का इनसे कई गुना बेहतर था। आदत खराब सत्ता पाने के लिए  मेरे ही नाम को भुनाएं  जा रहे हैं। 
 खैर आगे आगे देखते ही रहना है, मानव कौन से गुल खिलाएंगे।
  यह देखते हुए मुझे कई बार ऐसा लगा कि मैं नारद जी को धरती पर भ्रमण के लिए भेज दूं, पर कलयुगी मानव का क्या भरोसा नारद को ही
किसी जाल में फंसा कर
उसको झूठा और स्वयं को  महान 
बताकर मीडिया में खबर बनाकर लोगों को भ्रमित करते रहेंगे। मेरी नजर में तो भागवान सब एक थैली के चट्टे बट्टे, छोटे से आदमी से लेकर राजनेता, साहित्यकार, हर धर्म हर समाज का आदमी, चमत्कार में तो नहीं, पर थोड़ा सा करने पर अपने आप को बड़ा और महान बताने में तुला है। इसे हम महान समझे या कलयुगी मानव अपने आप को भगवान, ये तो
हर किसी की अपनी सोच, इतना सुनने के बाद लक्ष्मी जी ने प्रभु से कहा, जगत के पालनहार आप किस संदर्भ में कब क्या बात करेंगे। या आपकी माया आप ही जाने। मैं तो ध्यान लगाकर आज फिर किसी भक्त के घर मैं जाऊंगी । आप देखते रहिए साहित्य संगम संस्थान का पटल, और करते रहिए साहित्यकारों का अवलोकन।

सतीश लाखोटिया
नागपुर, महाराष्ट्र
9423051312.
9970776751

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