रविवार, 16 अगस्त 2020

चाँद


                    💐 चाँद💐    

कितना अनुपम कितना अलबेला,
     चमकें अम्बर पर चाँद अकेला।
    बीच सितारों के लगता जैसे ,
            हो रजनी का चितचोर।
       किरणों के रथ पर चढ़कर,
          नव-प्रभात में आता दिनकर।
      चाँद छुपे रजनी की ओट में,
            जब हो जाती है भोर।
दिनकर छुपे ओट बादल के,
         ले सितारों की बरात नभपर।
चमके चंद्रमा की चंचल किरणें,
       उत्सव मनाता हो जैसे अम्बर।
   गहरा तिमिर झिलमिल सितारे,
          मनमोहक किरणों से सजकर।
चाँद बिहँसता बन रजनी का प्रियतम,
                 रात चाँदनी रथ पर चढ़कर।
   खेल सितारों संग आँख-मिचौली,
             नैन नशीले टिम-टिम मटकाकर।
बन आगन्तुक रजनी का वो,
           छिटके चाँदनी नभपर ।
छुप- छुप रजनी के घूँघट में झाँके,
        सिन्दूरी आभा गगन में बिखराकर ,
सितारों के संग भूलभुलैया,
          चाँद अकेला खेले नभपर।
अप्रतिम, अनूठा सृजन प्रकृति का,
   अनुपम दृश्य अतुलनीय सबसे सुन्दर।


      🎊समाप्त🎊




 
Badlavmanch

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें