गुरुवार, 6 अगस्त 2020

कण-कण में राम हैं, राममयी चारों धाम है।

कण-कण में  राम हैं,
राममयी चारों धाम है।
राम जी की कृपा से बनते,
बिगड़े हुए बनते काम हैं।
कण - कण में  राम हैं...
जन -जन के अरमान हैं,
श्री राम में ही आराम है।
भारत माता की शान है,
यशस्वी - कीर्तिमान है।
कण कण में राम हैं...
हिंदवासी के अभिमान हैं,
श्री राम भव भूमि के मान हैं।
शाश्वत मर्यादा पुरुषोत्तम हैं,
आर्यावर्त-संस्कृति राम है।
सभ्यता में ये विद्यमान हैं।
कण -कण में  राम है।
श्री राम को प्रणाम है।
     ** एकता कुमारी **

Badlavmanch

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