शनिवार, 8 अगस्त 2020

समूचा दृश्य राम है

शीर्षक - राम है

समूचा दृश्य राम है
जीवन का उद्देश्य राम है
कर्म का विधान राम है
मर्यादा का प्रतिमान राम है
पीड़ा का बाम राम है
उद्वेलन का लग़ाम राम है
पुरूषों की पहचान राम है
भारत की शान राम है
राम में निहित राम है
अयोध्या में समाहित राम है
कण-कण में राम है
क्षण-क्षण में राम है
समाज में इंसान राम है
शबरी की जान राम है
संतों का धर्म राम है
योगियों का कर्म राम है
©® जितेन्द्र विजयश्री पाण्डेय "जीत"

©®सर्वाधिकार सुरक्षित। यह पूर्णतः मौलिक और अप्रकाशित रचना है।

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