गुरुवार, 27 अगस्त 2020

कवि अशोक शर्मा वशिष्ठ जी द्वारा 'राम की महिमा' विषय पर रचना

राम की महिमा

       जन जन के आराध्य श्री राम
मर्यादा पुरषोत्तम श्री राम
रघुकुल भूषण शिरोमणि राम
पतित पावन सीता राम

       जग मे सुंदर राम का नाम
किए प्रभु ने महान  काम
त्रेतायुग युग मे अवतरित राम
अयोध्या पुरी मे जन्मे राम

    दशरथ नंदन  भगवान श्री राम
बाल्यकाल से मेधावी श्री राम

भरत लखन शत्रुघ्न थे भाई
गुरु गृह गए पढन रघुराई
गुरु वशिष्ठ से विधा पाई
अल्पकाल विधा सब पाई

  असुरों ने ऋषियों को सताया
यज्ञ हवन मे  उधम मचाया
ऋषि विश्वामित्र ने राजा दशरथ को बताया
राम जी ने उन्हें विश्वास दिलाया
ऋषियों का यज्ञ संपन्न कराया

      ताड़का मारीच का किया उद्दार
दानवों का किया संहार

        शिला से  प्रकट हुई एक नारी
गौतम ऋषि की अहिल्या तारी

       राजा जनक ने  स्वयंवर रचाया
सीता जी का विवाह रचवाया
बड़े बड़े राजाओं को बुलाया
शिव धनुष को तोड़ना और प्रत्यंचा चढाना 
राजा जनक ने की थी घोषणा

    राजाओं ने बल लगाया
कोई भी धनुष तोड़ नहीं पाया
जनकपुरी मे सन्नाटा छाया

     विश्वामित्र ने राम को दिया आदेश
तोड़ो धनुष दे दो वीरता का संदेश

    राम जी आगे आए , धनुष को किया. प्रणाम
दिया शिव धनुष  को मान चढाई प्रत्यंचा
तोड़ कर धनुष दिया वीरता का प्रमाण

  मिथिला पुरी मे खुशी छाई
सीता जी ने वरमाला पहनाई
राजा जनक के बने जमाई
अयोध्यावासियों ने खुशियाँ मनाई
एक दूसरे को दी बधाई

    पर कैकेयी को यह खुशी रास न आई
मंथरा ने कैकेयी को भड़काया
भरत के लिए सिंहासन हेतु उकसाया

      कैकेयी ने मांगे दो वरदान
भरत के लिए राजपाट और राम को चौदह बर्ष वनवास
सुनकर दशरथ हुए उदास ,खो बैठे  अपना होश हवास
विफल हुए सारे प्रयास

     राम जी ने हंसी खुशी  अपनाया वनवास
सीता लखन  वनवास मे रहे साथ

  सीता का अपहरण हुआ
रधुकुल मणि दुखी  हुआ
 
  जटायु ने रावण को ललकारा
गजब की अपनी वीरता दिखाई
रावण से लड़ी भीषण लड़ाई
अंत में जटायु ने वीरगति पाई

     वनवास मे राम जी ने निषाद राज का किया उद्दार
दानवों का किया संहार  ,शबरी के जेठ बेर.खाए

     सुग्रीव को अपना मित्र बनाया
अपना मित्रधर्म  निभाया ,बाली को.यमलोक पहुचाया
किष्किंधा का राजा बनाया
हनुमान को राम ने अपना बनाया
हर्ष से उन्हें गले लगाया

राम जी ने वानरों का लिया सहारा
रावण कुंभकर्ण  मेघनाद को मारा
बिभीषन को दिया लंका का राज
रखी अपने वचन की लाज
प्रभु राम को मेरा प्रणाम

                     अशोक शर्मा वशिष्ठ

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