रविवार, 2 अगस्त 2020

काव्य मिश्रित भाषण प्रतियोगिता नेहाजैन स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में

 शीर्षक -कुछ याद उन्हें भी कर लें
मैं नेहा जैन आज स्वतंत्रता की74वी वर्षगांठ पर आप सभी हार्दिक बधाई देती हूं।
आज फिर मैं आपको आजादी के उस सफ़र की याद दिलाऊंगी जिसमे न जाने कितनी माँओं ने अपने बेटों, बहिनो ने भाइयों, औऱ पत्नियो ने अपने सुहाग का बलिदान दिया है।
"आज़ादी  की ये कहानी बड़ी पुरानी है
दी जिसकी खातिर कितने वीरों ने कुर्बानी है
तस्वीर फिर उन्ही की दिल में सजानी है
महकी जिनसे आज यह जिन्दगांनी है"
आज़ादी की अहमियत पिंजरे में बंद किसी पक्षी से पूछिए कि खुले आसमान में उड़ने क्या होता हैं
आज़ादी की कीमत सलाखों में बंद कैदी जनता है
जो चारदीवारी में बंद रहता है
ऐसे ही हम भी अंग्रेजी क़ैद में थे उनके नियम,कानून से ही हम भारतीयों का जीवन चलता था
हमें किसी तरह की स्वतंत्रता नही थी
स्वतंत्रता संग्राम की शुरूआत1857से हुई थीजिसे सिपाही विद्रोह माना जाता है उसकेबाद राष्ट्रीयकॉंग्रेस ने1929में अंग्रेजों से पूर्ण स्वराज्य की मांग की
1942मे गाँधीजी ने भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया। नेता जी सुभाष चंद बोस ने आज़ाद हिंद फौज बनाई जिसके द्वारा उन्होंने आजादी की लड़ाई लड़ी
भगतसिंह ,आज़ाद,अशफाक उल्ला खां, सुखदेव, राजगुरु,रामप्रसाद विस्मिलजैसे अमर सपूतों ने मातृभूमि के लिए हँसते हँसते अपने प्राण न्यौच्छावर कर दिए।
अपने जीवन का त्याग करके हमें आज़ादी के उजालों से भरी जिंदगी विरासत में दे गए
पर आज नौजवान नशे, अपराध ,आतंकवाद 
की ओर चलपड़े हैं
"न कोई श्रवण
न हरिश्चंद्र
जहाँ देखो वहाँ अब रावण है 
क्या यही वो गांधी का भारत है
कहाँ अब वो झांसी की रानी है
ये कहां आज भारत जाता हैं
बस अब सबको रुपया नजर आता है"

"न चिंता मातृ की
न परवाह भूमि की 
फिर यह संकल्प आज सबको दिलाती हूँ
जननी, जन्मभूमि स्वर्ग से महान
देशभक्ति का दिया दिल मे सबके जलाती हूँ
मैं नेहा स्वतंत्रता दिवस मनाती हूं
और कसम अपने भारत की रक्षा की खाती हूं।
जय हिंद जय भारत वंदे मातरम

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