सोमवार, 31 अगस्त 2020

कवि सूरज सिंह राजपूत जी द्वारा कविता : 'मैंने भूख लिखा' विषय पर।


Regards,

Er. Suraj Kumar Singh

मैंने भूख लिखा

मैंने भूख लिखा
फिर भी
न लिख सका
वह ' भूख '
जो उसे लगी थी !
मेरे भूख में
बेरोजगारी
मंदी
समीक्षा
अशिक्षा का जिक्र था ।
उसके भूख में बस ' भूख ' !
मैंने भूख लिखा
फिर भी
न लिख सका
वह ' भूख '
जो उसे लगी थी !
मेरे भूख में
लाचारी
बंदी
परीक्षा
परिक्षा का जिक्र था ।
उसके भूख में बस ' भूख ' !
मैंने भूख लिखा
फिर भी
न लिख सका
वह ' भूख '
जो उसे लगी थी !
क्योंकि,
भूख लिखते वक्त
मैं ट्रेन के ए. सी. बोगी में था ।
वह भूखा प्लेटफार्म पर !
क्योंकि,
भूख लिखते वक्त
मैं अपने ए. सी. कार में था ।
वह भूखा सिग्नल पर !
मैंने भूख लिखा
फिर भी
न लिख सका
वह ' भूख '
जो उसे लगी थी !
क्योंकि,
मैंने भूख लिखना चाहा ।
उसने भूख मिटाना !
क्योंकि,
मेरे भूख से अलग थी ।
उसकी ' भूख ' !

- सूरज सिंह राजपूत

मीडिया प्रभारी
अखिल भारतीय साहित्य परिषद, जमशेदपुर
झारखंड

घोषणा / स्वयं सत्यापन
मैं यह सत्यापित करता हूं कि यह रचना मेरी मौलिक रचना है जिसके सर्वाधिकार मेरे पास सुरक्षित हैं विवाद की स्थिति में पूरी जिम्मेवारी मेरी होगी ।

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