सोमवार, 24 अगस्त 2020

कवयित्री शशिलता पांडेय जी द्वारा 'साल 2020' विषय पर कविता

🐊साल 2020🐊
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साल 2020 बड़ा दुखद अहसास,
लिख गया वैश्विक महामारी के नाम।
काल के पटल पर कोरोना काल।
रचा एक काला अमिट इतिहास,
कवारेटिंन में बीतता रहा पूरा साल।
लाखों की संख्या में लोग असमय,
समाते जा रहे दिनोदिन काल के गाल।
जाने कितनों को लील जाएगी?
बड़ी भयानक ये कोरोना महामारी।
2020 का उपक्रम महामारी कोरोना 
अभी भी निरंतर कहर है जारी
2020 में  निश्चित ही होगा अंत।
आशा की एक किरण और विश्वास,
2020 में ही होगी हमारी जीत।
नूतन आगाज नया होगा साल,
अपनो से अपनो की दूरियां मिटेंगी।
अब 2021 दिखायेगा अपना कमाल,
सामाजिक दूरियां मजबूरियाँ मिटेगी।
अँधेरो के बाद हम उजालो की ओर,
2020 के अंत मे सुनहरा प्रभात-काल।
फिर से अब मिलजुल कर होली,दीवाली,
दुर्गापूजा उत्सव-त्योहारों पर होगा धमाल।
जग की रीत दुख-सुख दोनों से ही प्रीत,
बीत ही जायेगा एक दिन कोरोना काल ।
मौत के मैदान में होगी जिन्दगी की जीत,
हम एक दुसरें के घर जाकर पुछेंगे हाल।
फिर से बढ़ जाएगी मानव से मानव की प्रीत,
निश्चित ही समाप्त होगा  कोरोना का जाल।
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               🐶समाप्त🐶


स्वरचित और मौलिक
सर्वधिकार सुरक्षित
रचनाकारा- शशिलता पाण्डेय

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