सोमवार, 3 अगस्त 2020

मैथिली शरण गुप्त (अशोक शर्मा वशिष्ठ)

आज राष्ट्रकवि श्री मैथिली शरण गुप्त जी का जन्मदिन है उनको काव्यमयी श्रृद्धांजलि प्रस्तुत कर रहा हूँ

            मैथिली शरण गुप्त

         राष्ट्र कवि मैथिली शरण गुप्त को प्रणाम
साहित्य भूषण आपने किए महान काम
आपकी साहित्य सेवा को याद करता है हिंदुस्तान
अपनी धारदार पैनी कलम से दिलाई सशक्त पहचान

    पिता रामचरण कनकने माता काशीबाई की योग्य संतान
चिरगांव जिला झांसी आपका जन्मस्थान
अपनी सशक्त लेखनी से बढाया देश का मान
अर्जित किए अनेकों सम्मान

  बचपन से ही थे प्रतिभाशाली
ब्रजभाषा मे कई कविताएं रच डाली

   दद्दा का अपनाया उपनाम
रचे कई नए आयाम
 
    महात्मा गांधी के सच्चे अनुयायी
देश प्रेम की अलख जगाई
जनता मे राष्ट्रीयता की प्रीति लगाई
स्वतंत्रता की लड़ी लडाई

      महात्मा गांधी थे उनके प्रशंसक
महावीर प्रसाद दिवेद्दी के सच्चे शिष्य और साधक
मा शारदा के निष्ठावान आराधक
साहित्य के थे सच्चे उपासक
 
   दो महाकाव्यों 18खंडकाव्यों का सृजन किया
राष्ट्र को साहित्यिक उपहार दिया
महात्मा गांधी ने राष्ट्र कवि घोषित किया
अपने साहित्यिक कृतियों से उपाधि को.न्यायोचित किया

   उनके साहित्य मे प्रमुख था प्रगतिवाद
मेघनाद वध ब्रजांगना का किया अनुवाद
  
     पंचवटी साकेत यशोधरा के रचनाकार
सामाजिक रुढियों पर किया प्रहार

नारी चरित्र को उन्होंने उभारा
उर्मिला यशोधरा जैसे पात्रों का बने सहारा

भारत भारती का किया सफल प्रकाशन
अनेक रचनाओं का किया कुशल संचालन

प्राप्त किए अनेक पुरस्कार
पदम भूषण हिंदुस्तान अकादमी पुरस्कार
प्रकृति से अगाध था प्यार
भारतीयता के थे संस्कार

साहित्य सूर्य को शत शत प्रणाम

      अशोक शर्मा वशिष्ठ

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