गुरुवार, 23 जुलाई 2020

लिखना आप का शौक है, बेशक लिखिए और लिखते रहिए , खूब लिखिए......

लिखिए.......

लिखना आप का शौक है, बेशक लिखिए और लिखते रहिए , खूब लिखिए......
किसी की तारीफ में लिखते हैं तो, किसी की बदहाली को भी लिखिए......
गांव के सौंदर्य को तो लिखते हैं और गांव के समस्या को भी कभी लिखिए.....
देश के हर अमीर के नंबर को लिखते हैं,कितने गरीब है उसकी संख्या को भी लिखिए.....
किसी के कामयाबी का सफर लिखते हैं तो, किसी की नाकामयाबी के कारण भी लिखिए......
अच्छी शिक्षा,सुविधा,खाना के बिना सपनों के साथ जिंदगी मर रही है उसको भी लिखिए......
तरक्की करती हुई सरकार के साथ पिछड़ी हुई समाज और लोगों को भी लिखिए........
धन वालों के साथ, रोटी के लिए जो दिन रात मर रहा है उसको भी लिखिए......
पुलिस के कामयाबी को तो लिखते हैं और उसकी दलाली को तो भी लिखिए.....
कलमकार है,लिखना जानते हैं,आप ही लिख सकते हैं और खूब लिखिए......
महंगाई,भुखमरी और भ्रष्टाचार से जो पिस रही जनता के दर्द को भी लिखिए.....
गरीब,बेबस,लाचार जो अभी भी शोषित हो रहे हैं उसके दर्द को भी कभी लिखिए......
दलाली,घूसखोरी,भ्रष्टाचारी के चलते जो सपने मर रहे हैं,उन सपनों को कभी लिखिए.....
धर्मो के बीच में जो फैली है पाखंड और अंधविश्वास को भी कभी लिखिए......
सामाजिक असमानता जो अभी भी चरम पर पहुंची हुई है कभी उसको भी लिखिए......
जुल्मी और दरिंदों के सामने जो कलम बिक रही है उसको भी कभी लिखिए.....
बेदर्दी का दिया हुआ जो असहनीय दर्द की चीख है उस दर्द को भी कभी लिखिए.......
जुल्मी के जुल्म से जो तड़प रही है इंसान, इन इंसानों कि तड़प को भी लिखिए........
आंसू को लिखिए मगर,जरूरी है आंखों से टपकते खून की आंसू को भी लिखिए........
अमीर के पास तो हक ही पहुंच जाती है अपने हक के लिए तड़पती जिंदगी को लिखिए.......
उजड़ी पड़ी हुई झोपड़ी,बंद पड़ी हुई चूल्हा,भूख से तड़पती,दर्द से कहारते इंसानों को लिखिए.....
बारिश से घर में टपकती हुई बूंदे,ठंड से ठिठुरते हुए लोगों के हालात को कभी लिखिए......
भीख मांगते,कचरा चुनते हुए बच्चे,सड़क के किनारे पड़ी लावारिस लाशें को भी लिखिए........
एक कलम ही है जो सबको न्याय,हक,रोटी,सुविधा दिला सकती है इसकी ताकत को पहचानिए.....
कलम ही सबसे ताकतवर है इससे हर जुल्मी भी डरता है अपने धर्म को बचाइए,सच्चाई को लिखिए......
©रूपक

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