रविवार, 12 जुलाई 2020

प्रकृति-सानिध्य



प्रकृति-सानिध्य
सदा सानिध्य में रहता ,
शान बस मान भर ही है ।
जिसकी पनाह पाकर ,
महफूज दान भर ही है ।।
प्रकृति से ना छेड़ो ,प्रण लो ,
ए वसुंधरा वालो ।
सजा दो वृक्ष वरना मानव ,
मात्र प्राण भर ही है ।।
डॉ अनुज कुमार चौहान "अनुज"

अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश )

9458689065

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