रविवार, 12 जुलाई 2020

हमसफ़र पाने के बाद

हमसफ़र पानेे के बाद

आज सजते और संवरते ,उनके आ जाने के बाद ।
हम सफ़र करने को निकले ,हम सफ़र पाने के बाद ।।
खिल रहें हैं फूल इतने ,लग रहा आई बहार ।
और गुलशन बन गया मन ,उनके खिल जाने के बाद ।।
मुस्कराती जिन्दगी ,जज्बात से मुरझाई थी ।
आ गए बन कर उजाला ,तम के ढल जाने के बाद ।।
दूर जो हमसे रहे ,अन्जान थे हमसे सदा ।
बन गए पहचान अब वे ,गम के थम जाने के बाद ।।
राह भी ऐसी नहीं थी ,और मंजिल यह नहीं ।
आज ही बदला है रस्ता ,उनके घर आने के बाद ।।
प्रीत मन में सज रही ,अब बज रहीं शहनाईयाँ ।
आज तक सोचा नहीं ,क्या ? होगा गिर जाने के बाद।।
गीत को जाने बिना ना ,गीत मिल पाते सहज ।
गीत का घर बन गया मन ,उनके शरमाने के बाद ।।
सादगी ,संजीदगी ,ऐसी कहाँ ? सीखी "अनुज " ।
तुम भी इतराके चले हो ,उनके इतराने के बाद ।।
नाम :डॉ अनुज कुमार चौहान "अनुज "
अलीगढ़ ( उत्तर प्रदेश )
9458689065

आज सजते और संवरते ,उनके आ जाने के बाद ।
हम सफ़र करने को निकले ,हम सफ़र पाने के बाद ।।
खिल रहें हैं फूल इतने ,लग रहा आई बहार ।
और गुलशन बन गया मन ,उनके खिल जाने के बाद ।।
मुस्कराती जिन्दगी ,जज्बात से मुरझाई थी ।
आ गए बन कर उजाला ,तम के ढल जाने के बाद ।।
दूर जो हमसे रहे ,अन्जान थे हमसे सदा ।
बन गए पहचान अब वे ,गम के थम जाने के बाद ।।
राह भी ऐसी नहीं थी ,और मंजिल यह नहीं ।
आज ही बदला है रस्ता ,उनके घर आने के बाद ।।
प्रीत मन में सज रही ,अब बज रहीं शहनाईयाँ ।
आज तक सोचा नहीं ,क्या ? होगा गिर जाने के बाद।।
गीत को जाने बिना ना ,गीत मिल पाते सहज ।
गीत का घर बन गया मन ,उनके शरमाने के बाद ।।
सादगी ,संजीदगी ,ऐसी कहाँ ? सीखी "अनुज " ।
तुम भी इतराके चले हो ,उनके इतराने के बाद ।।
नाम :डॉ अनुज कुमार चौहान "अनुज "
अलीगढ़ ( उत्तर प्रदेश )
9458689065

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