शुक्रवार, 24 जुलाई 2020

तार था जब मृत्यु सूचक , प्यार थी तब चिट्ठियां ।

विषय :- *"चिट्ठियां"*
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तार था जब मृत्यु सूचक , प्यार थी तब चिट्ठियां ।
हमने देखा वो समय अभिसार थी  तब चिट्ठियां ।

बिलबिलाहट रहती दिल में साड़ी का आँचल नरम ,
पूँछते घर में ही घुसते ख्वार थी तब चिट्ठियां ।

नासिका का भाग जब कुछ लाल हो तब इस तरह ,
सुरसुराहट कंठ में इनकार तब थी चिट्ठियां ।

बांच पाए या ना पाये आईना मन जानता ,
बात कोई है , गज़ब झंकार थीं तब चिट्ठियां ।

तार की बातें न पूछो दिल धड़कते आने पर ,
पेट पड़ती मरोड़े , अतिसार थी तब चिट्ठियां ।

आ रही है बड़ी बिटिया कानपुर से शुक्र को ,
भेज देना बाबू तांगा , बहार थी तब चिट्ठियां ।

है तगादा रुपये का , मानो ना मानो बात तुम ,
क्या लिखा जल्दी पढ़ो अंगार थी तब चिट्ठियां ।

गाय ने बछड़ा दिया , जल रही रन्नो बुआ ,
हम कुशल से हैं , यहाँ पर भार थी तब चिट्ठियां ।

-- सुनील दत्त मिश्रा  
   फ़िल्म एक्टर 
   लेखक बिलासपुर 
   छत्तीसगढ़
@सर्वाधिकार सुरक्षित 
Image Creation by :- Shivshankar lodh Rajput
छायाचित्र साभार:-श्री शिवशंकर लोध राजपूत

Badlavmanch

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