रविवार, 26 जुलाई 2020

क्या तुम मेरी मोहब्बत बनोगी

क्या तुम मेरी मोहब्बत बनोगी*, 
या फिर यूँ ही तड़पता छोड़ दोगी*, 

क्या तुम मुझे अपना गीत बनाओगी*, 
या फिर मेरा सरगम तोड़ जाओगी*, 

*क्या तुम सावन के झूलों में झूलाओगी*, 
*या फिर हवा बनकर गुजर जाओगी*, 

*क्या तुम मुझे अपने ख्वाब में  बुलाओगी*, 
*या फिर, ख्वाब ही बनकर रह जाओगी*.. 
*डॉ सत्यम भास्कर भ्रमरपुरिया*


मुक्तक

*ख्वाब का मैं शहंशाह हूँ, बगावत का बादशाह*, 
*करता हूँ मैं अपनी मर्जी, लेकिन नहीं मैं तानाशाह*.
              *भ्रमरपुरिया*

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