शनिवार, 25 जुलाई 2020

नमन उन विर सपूतों को

बदलाव मंच

स्वरचित गजल

नमन उन विर सपूतों को

24/7/2020


जिन विरो के कारण हम आज 
बेफिक्र होकर आराम करते है।।
ऐसे हिन्द के विरो हम प्रणाम करते है।

जिन्होंने बचाने देश का गौरव अपना सर कटवाया।
तिरंगे के शान के खातिर जिन्होने है अपना सर्वस्व लुटाया।।

जो रात दिन हमारे लिये सोते नही चैन से।
जीन फ़ौलादो के अंगारों में भी अश्रु बहते नही नैन से।।
उन शूरवीरों को ह्रदय से सम्मान करते है।।


चाहे हो रेगिस्तान  सामने चाहे बर्फ के पहाड़।
हर मुश्किल से निपटने को रहते है तैयार।।

जिनको हिमालय भी मान देते है।
जो इस धरती को लहलहाने को 
अपना लहू दान देते है।।

 ख़ुदको जो गर्व से कहते सैनिक।
जो जान पर खेलकर सुरक्षित बनाते है हमारे दैनिक।।

उन महारथियों के सम्मान में आओ सर हम झुकाए।
उन विरो के सपने को हकीकत हम बनाये ।।

क्या इतना भी नही कर सकते उनके लिए जो
 हमारे लिए अपनी खुशियाँ तमाम देते है।।
©प्रकाश कुमार

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