रविवार, 12 जुलाई 2020

मानव आहार के विरुद्ध मांसाहार


मानव आहार के विरुध्द मांसाहार 

मानव आहार के विरुध्द मांसाहार सुरा ,
बिडी सिगरेट ,सुर्ति नशा सब बेकार है ।
नही प्राणवान है महान मानव योनि में वो ,
जिसको लोभ ,काम ,कृपणता से प्यार है ।

अवगुण का खान इन्सान बने नाहक में ,
मांस ,मछली ,सुरा नशा जिसका आहार है ।
सर्व प्रगति का गति अवरोध करे ,
ऐसा जहर सुरा नशा मांसाहार है।

काम ,क्रोध ,लोभ -मोह ,मत्सर हैं दास इसका ,
कौल है कराल काल अवगुण हजार है ।
सर्व के विकास मूल महिमा को नाश करे ,
देव अधोगति यही नरक का व्दार है ।

धीक धीक धीक लीक ताज्य मांसाहार सुरा ,
यही तो जीवन का प्रथम सुधार है।
"कवि बाबूराम "ना मानव अमानव बन ,
बिगणत अनमोल मानव योनि का श्रृंगार है ।

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बाबूराम सिंह कवि 
ग्राम -बड़का खुटहाँ ,पोस्ट -विजयीपुर (भरपुरवा )
जिला -गोपालगंज (बिहार )मो0नं0-9572105032
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वेवसाइड पर प्रकाशनार्थ

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