सोमवार, 13 जुलाई 2020

महाभारत:द्रौपदी चीर हरण{दुशासन दुर्योधन उवाच}

महाभारत:द्रौपदी चीर हरण{दुशासन दुर्योधन उवाच}
【द्रौपदी के पाँच पति पर प्रश्रचिन्ह】
आँखन देखी बतिया सुनावत गे माई।
देखी सुनी के करेजा फाटत गे माई।
बीच भरल सभा मे अधर्मी दुशासन,
द्रौपदी के साड़ी खीचत गे माई।।

पाँच पाँच पति के लछमिनिया
पाँच पाँच ससुर के बहुरानिया
पाँच पाँच पुत्रण के महारानिया
पाँच पाँच बिटिया में छोट बहिनिया
पाँच पाँच बड़ पंचन के आगे,
खुटबा से बंधल गैय्या जैसन डोलत गे माई।
बीच भरल सभा मे अधर्मी दुशासन,
द्रौपदी के साड़ी खीचत गे माई।।

जुअबा में हारल युधिष्ठिर धरम।
नाश करल आपन अरजल करम।
लाज नैय आवे पितामह तोरा।
तोहरे पंचायत में ई दुर्गति मोरा।
टुकुर टुकुर ताके सब लोगन,
केहू कुछो नही बोलत गे माई।
बीच भरल सभा मे अधर्मी दुशासन,
द्रौपदी के साड़ी खीचत गे माई।।

अंहरा के पूत अंहरा दुर्योधन
बड़ी भारी पड़ल कहनी द्रौपदी के।
स्वयंवर में अपमानित कर्ण
आवेश में वेश्या कहनी द्रौपदी के।
पाँच पाँच पति के भार जे सहे।
ऊ कैसे सती सावित्री बन के रहे।
जांघिया उघार बइठल दुर्योधन,
अंगिया देखन को नैना टोहत गे माई।
बीच भरल सभा मे अधर्मी दुशासन,
द्रौपदी के साड़ी खीचत गे माई।।

नारी जाति के मान सम्मान तुम कइसे।
सीता अनुसुइया के अभिमान तुम कइसे।
एगो नारी के पाँच पाँच मरद,बोलो
गौरी नारायणी के स्वाभिमान तुम कईसे।
वंश की लाली नही,स्त्री कुल की गाली हो।
कलंक हो स्त्री जाति की,बेहया मवाली हो।
कुल वधु की दीप नही,अमावस की रात काली हो।
स्त्री जाति  शर्म करे तुझपे ,स्त्री अनादर वाली हो।
गाल फूलाय के जोर जोर से,दुर्योधन
पंचाली को क्या क्या नही गारी बोलत गे माई।
बीच भरल सभा मे अधर्मी दुशासन,
द्रौपदी के साड़ी खीचत गे माई।।

कइसे मानी रे पंचाली ,पाँच में बंट जाने को।
 बेबकूफ नही तुम फल, पांच में कट जाने को।
माता कुंती तो थोपा नही  अपना हठी राय।
खून खौला नही कृष्ण का कहाँ गया धर्म न्याय।
निमोछिये अर्जुन भी मरद कैसा जो ये बर्दास्त करे।
उसकी पत्नी कभी धर्म अभी भीम को परास्त करे।
स्वयंवर में जीता किसने,किसको तुमने वरण किया।
किस आधार पे फिर तुमने, पांचो के संग शयन किया।
माता पुत्री बहन समस्त स्त्री कुल तुमसे लज्जित है।
मानव तो छोड़ो ये रिवाज तो राक्षस में भी वर्जित है।
यदि तू सही है तो अपनी पुत्री की पांच व्याह रचाती।
और एक नई व्याह परम्परा की शुरूआत दिखाती।
क्या फर्क है बोलो तुझमे और पशुओं में।
लांछन से द्रौपदी भींग रही थी अशुओ में।
{आगे जारी रहेगा भाग 2 में}
26।06।2020
सुनील कुमार सोनू

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