शुक्रवार, 17 जुलाई 2020

ना रोते हम अंधेरों में :यदि !!

ना रोते हम अंधेरों में:यदि !!
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ना होते हम अंधेरों में ,
ना खोते हम अंधेरों में ।
ना सोते हम अंधेरों में ,
ना रोते हम अंधेरों में ।।
                      :यदि
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आंखों में चमक होती ,
जीने में रमक होती ।
बहारों में महक होती ,
इरादों में धमक होती ।।

ज्वाला सी दहक होती ,
बढ़ने की ललक होती ।
मोहब्बत सी तड़प होती ,
हृदय में कसक होती  ।।

ना होते हम अंधेरों में,
ना खोते हम अंधेरों में ।
ना सोते हम अंधेरों में;
ना रोते हम अंधेरों में ।।
डॉ अनुज कुमार चौहान "अनुज "
अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश )

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