शुक्रवार, 24 जुलाई 2020

क्रांतिकारी बदलाव... (महाकाव्य अंश)

क्रांतिकारी बदलाव... (महाकाव्य अंश)
*रो मत झर-झर*
*मार ठोकरों को ठोकर*
*यूं चल मत डर-डर*
*काँप मत यूं थर-थर*

*रह मत हार कर*
*मत कर बात भर*
*कर्म कर, कर्म कर*

*चाहे सूखे प्यास से अधर*
*थके चाहे जानों-जिगर*
*कठिन कितना भी लगे डगर*
*क्षणभर भी रुकना मत मगर*

*हो मंज़िल की नाभिकुंड में नज़र*
*सुबह-शाम-रात-दोपहर*
*टूट खुद पर बनकर कहर*

*जब उगले निराश मन ज़हर*
*गिर-गिर के उठ जैसे लहर*
*फिर जरूर चमकेगा जैसे दिनकर*
*मार ठोकरों को ठोकर*
*यूं चल मत डर-डर*

क्रमशः..... 

*दीपक क्रांति*

Badlavmanch

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