रविवार, 12 जुलाई 2020

आया सावन झूम के

आया सावन झूम के
मेघ बरसता है सावन में 
आशा विश्वास लिये
उमड़ घुमड़ बदरा आवे
जीया डरावे कही बरसे कही
बिजली गिरावै  कही
जिया तरसावे आया सावन झूम के मिटटी का प्यास लिए।।

पवन का शोर रिम झिम
कही घनघोर बरसे
कहि उदासी कही ख़ुशी आया सावन झूम अरमानो का
अभिमान लिए।।
आया सावन झूम के
डाली डाली पर झूला
कजरी का राग रंगीला
राधा संग कांधा झूले झूला
कच्चे धागे का बंधन
भाई बहन का प्यार आशिर्बाद दुलार लिये।।

हरियाली की खुशहाली
अतिसय की बारिश की
बाढ़ डूबते आरजू के आसमान
आँखों में रश्क के अश्क 
दुःस्वरियो का दर्द 
आया सावन झूम के
गम का शोला शैलाभ लिये।।

आया सावन झूम के
डूब गयी किसान की उम्मीदे
ध्वस्त हो गया आशियाना
जिंदगी बेहाल मदद के
हाथ की तलाश
खोजता रोटी दाल 
बच्चे भूख से बेहाल।
छुटा घर वार तम्बू 
नाव विलखते जिंदग
के ठौर ठाँव लिए।।

आया सावन झूम के
गोरी का इन्तज़ार 
सावन में सुहाग की मेहदी
का रंग सुर्ख लाल पिया 
के प्यार का परवान 
लांखों का सावन चला जाए
पिया नहीं आये 
दो टके की आमदनी
में पिया जिया को विसराय
सावन यौवन की आग लिये।।

आया सावन झूम के 
दुनियां नाचे ख़ुशी के पाँव
विरहिन विरह की वेदना
आँखों से सावन वर्षा जाय
पहला सावन ना हाथ की
मेहदी सुखी ना बिता मधुमास
सुनी हो गयी मांग सुहागिन
शहीद बेवा
सावन की रिमझिम बौछार
लगे चिंगारी आग 
आया सावन झूम के जन्म
जन्म का इंतज़ार लिये।।

आया सावन झूम के
पवन का शोर नाचे मोर
सजनी का चित चोर
कजरी झूला हरियाली खुशहाली
मधुबन में राधा कान्हा का सावन
स्वर्ग से सुन्दर अवनि का आभास
लिये।।

भय भयंकर बाढ़ व्याधि विभीषिका सब कुछ खो
जाने का दंश  बिछड़ गए
उनकी यादो की पीड़ा संग 
दाने दाने को लाले खड़े
धरती पर देखते आसमान हाथ
पसारे
कोषते भाग्य भगवान 
आया सावन झूम के बर्बादी
का मंजर मेहमान लिये।।

सावन का बदरा बुँदे 
घटाए सबके लिये प्यार 
ख़ुशी की सौगाते लाये
जैसी जिसकी किस्मत
वैसा सावन की बूंदों से पाये
आया सावन झूम के
लाया सावन उपहार सौगात लिये
की रिम झिम फुहार बौछार बिजली वर्षात लिये।।


नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर

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