रविवार, 19 जुलाई 2020

मंगल_पांडे (क्रांतिकारी)

#मंगल_पांडे (क्रांतिकारी)
* मंगल पांडे प्रथम भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रथम क्रांतिकारी थे
* भारत की आजादी की पहली लड़ाई अर्थात 1857 के संग्राम की शुरुआत इन्हीं के विद्रोह से शुरू हुआ था
* मंगल पांडे का जन्म 19 जुलाई 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा गांव में हुआ था
* मंगल पांडे का जन्म तारीख व स्थान पर अभी भी विवाद है
* मंगल पांडे के पिता का नाम दिवाकर पांडे और माता का अभय रानी देवी था
* मंगल पांडे एक बहन और तीन भाई थे
* मंगल पांडे जीवन भर अविवाहित थे
* मंगल पांडे कट्टर पंडित थे
* एक बार मंगल किसी काम से अकबरपुर आए थे उसी समय ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना बनारस से लखनऊ जा रही थी मंगल सेना का मार्च देखने के लिए कौतुहलवश सड़क के किनारे आकर खड़े हो गये
* एक सैनिक अधिकारी ने मंगल पांडे को तगड़े और स्वस्थ देखकर सेना में भर्ती हो जाने का आग्रह किया, गरीब ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने के कारण उन्हें रोजी-रोटी की मजबूरी ने अंग्रेजों की फौज में नौकरी करने पर मजबूर कर दिया
* 10 मई सन 1846 को मंगल पांडे ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में भर्ती हुए
* मंगल पांडे कोलकाता के पास बैरकपुर सैनिक छावनी में 34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री की पैदल सेना के 1446 नंबर के सैनिक थे
* मंगल को वेतन के रूप में ₹7 प्रति महीना मिलता था
* 30 जनवरी 1857 को एक जमादार ने इन्हें यह बताया कि अंग्रेज जो कारतूस देते हैं वह गौ मांस का बना होता है
* गौ मांस के नाम पर मंगल पांडे आग बबूला हो गए और अपने साथी सैनिकों को भी बताएं तो वह भी क्रोधित हो गए
* 29 मार्च 1857 की सुबह बैरकपुर छावनी के परेड मैदान में मंगल पांडे ने अंग्रेजो के खिलाफ बिगुल फूंका था
* जनरल ह्राूसन ने एक जमादार को मंगल को गिरफ्तार करने का आदेश दिया पर वह अनसुना कर दिया था क्योंकि वह भारतीय था इसलिए इसे 6 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई थी
* मिस्टर बासु घोड़े पर सवार होकर मंगल की तरफ आने लगे तो मंगल ने उनपर गोलिया दाग दी और वह नीचे गिर गए इस तरह आजादी की पहली गोली चली थी
* मंगल पांडे ने ह्राूसन के बीच में आने पर उसे भी गोली मार दिए थे और इस तरह पूरा बैरकपुर छावनी गोलियों से गूंज उठा था
* मंगल पांडे ने अपने साथी सैनिकों के साथ न देने पर खुद को गोली मार ली और घायल हो गए जिससे वह गिरफ्तार कर लिये गये
* मंगल पांडे को फांसी की सजा 18 अप्रैल 1857 को रखी गई थी पर लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन के कारण उसके 10 दिन पहले ही 8 अप्रैल 1857 को इन्हें फांसी दे दी गई
* धर्म के लिहाज से कोई जल्लाद इन्हें फांसी देने को तैयार नहीं था इसलिए अंग्रेजों ने कोलकाता से एक जल्लाद को बुलाया था जिसे यह नहीं बताया गया कि उसे किसे फांसी देनी है
* मंगल पांडे जिस पलटन में थे, उसके सारे सैनिकों को सस्पेंड कर दिया गया क्योंकि अंग्रेज़ों को शक था कि वो सभी मंगल पांडे जैसे विचार रखते है और किसी भी समय उनके खिलाफ़ विद्रोह कर सकते है

सुरेन्द्र बिमल जी के कलम से

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