शुक्रवार, 24 जुलाई 2020

याद तेरी आ ही गई




याद तेरी आ ही गई 
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मत होना कभी हैरान ,
याद तेरी आ ही गई ।
मत बनना कभी अनजान ,
याद तेरी आ ही गई ।।
तेरी यादों में मेरे प्राण ,
याद तेरी आ ही गई ।
ना होगे कभी बेजान ,
याद तेरी आ ही गई ।।
आँखो के रिश्ते आँखो से,
जाने  पहिचाने जाते हैं ।
तुम बिन देखे मेहमान ,
याद तेरी आ ही गई ।।
अनसुने शब्द झरनों की मुश्किल,
कैसे ?नदियाँ बन जाते हैं ।
तुम बन गये थे मेरी पहिचान ,
याद तेरी आ ही गई ।।
साथ रहें ना बात करें ,
बैचैन कहाँ ?रह पाते हैं ।
अहसान मेरे अरमान ,
याद तेरी आ ही गई ।।
याद कभी घवरा ना जाये ,
घवरा के हम मुस्काते हैं ।
क्यों ? बन गए थे मेरी मुस्कान ,
याद तेरी आ ही गई ।।
जब फूल खिले कलियाँ कहती ,
सपनों में द्वंद खो जाते हैं ।
नहीँ "अनुज"बनो भगवान ,
याद तेरी आ ही गई ।।
डॉ अनुज कुमार चौहान "अनुज"
अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश)
9458689065

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