गुरुवार, 30 जुलाई 2020

आके नजदीक दिल दु:खाते हो






आके नजदीक दिल दु:खाते हो 
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क्यों ? मेरे दिल में ,
बसे जाते हो ।
आके नजदीक ,
दिल दु:खाते हो ।।
जब सितारों को दिन में ,
चमकना न था ।
फूल गुलशन में हर पल ,
महकना न था ।।
क्यों ? फिज़ाओं के ,
सपने सजाते हो ।
आके नजदीक ,
दिल दु:खाते हो ।।
मैनें जीवन में ऐसा ,
विचारा न था ।
खुद को दर्पण लिये भी ,
निहारा न था ।।
मेरा चेहरा क्यों ?
मुझको दिखाते हो ।
आके नजदीक ,
दिल दु:खाते हो ।।
दूर होते हो मन ,
बस में रहता नहीं ।
पास आते ही बढ़ती हैं,
मुश्किल बड़ी ।।
क्यों ? जाके ,
खयालों में आते हो ।
आके नजदीक ,
दिल दु:खाते हो ।।
चिन्तन अनुज का ,
बचना सदा ।
तन्हा रहके अकेले ही,
सहना सदा ।।
पाठ ऐसा क्यों ?
मुझको पढ़ाते हो ।
आके नजदीक ,
दिल दु:खाते हो ।।
डॉ अनुज कुमार चौहान "अनुज "
अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश )

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