शुक्रवार, 24 जुलाई 2020

दोहा छंद और सवैया मैंने चौपाई नहीं सीखी मुंह भलाई पीठ पै करना मैंने बुराई नहीं सीखी

मंच को नमन
मुक्तक
दोहा छंद और सवैया मैंने चौपाई नहीं सीखी
मुंह भलाई पीठ पै करना मैंने बुराई नहीं सीखी
माणिक सुंदरता का लगा मुखौटा व्यापार नहीं करता
झूठ की करना प्रशंसा मैंने चतुराई नहीं सीखी
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मौलिक मुक्तक
भास्कर सिंह माणिक (ओज कवि एवं समीक्षक) कोंच, जनपद-जालौन,उत्तर- प्रदेश-285205

Badlavmanch

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