शनिवार, 25 जुलाई 2020

माँ

ऐसे तो माँ पर लिख पाना किसी के बूते की बात नही है। माँ के बारे में जितना कहा जाए कम है।मेरी छोटी सी कोशिस माँ को चंद शब्द समर्पित करने की।एक छन्दमुक्तरचना प्रस्तूत है।🙏

#माँ

माँ तुम ममता की मूरत हो,
दुनियाँ की सबसे सुंदर सूरत हो।
माँ तुम बिन जग सुना लगता है,
माँ तुम मेरी पहली जरूरत हो।।
माँ भगवान का रूप हो तुम,
प्यारी वसुंधरा का स्वरूप हो तुम,
जिसका दामन ममता से खाली ना हुआ।
वही यशोदा का रूप हो तुम।।
माँ तुमसे ही मेरा मान है,
इस धरा पर मेरा सम्मान है।
तेरा ही रक्त मुझमें है बहता,
तुमसे ही इस जग में अभिमान है।।
माँ मुझे इतना कौन दुलारेगा,
इतना प्यार से कौन पुकारेगा।
आज अपने आँचल में समेट लेती हो,
तेरे बाद मुझे कौन सम्हालेगा।।
तुमसे अलग होकर हौसला टूटने लगता है,
नजर ना आती हो तो जान छूटने लगता है।
माँ मेरी इस देह का प्राण हो तुम,
साथ ना रहो तो दम घुटने लगता है।।
 माँ क्या मेरा एक काम करोगी,
जीवन भर क्या मेरे साथ रहोगी।
माँ मुझसे वादा करो ना आज,
मुझे छोड़ कर कभी ना जाओगी।।
मुझे छोड़ कर कभी ना जाओगी।।
             @सुजित संगम
                 बाँका, बिहार

Badlavmanch

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