रविवार, 12 जुलाई 2020

बदलाव नियम है ज़िंदगी का,बदलाव दस्तूर है ज़िंदगी का।


बदलाव नियम है ज़िंदगी का,
बदलाव दस्तूर है ज़िंदगी का।
बदलाव न हो तो ऊब जाता है आदमी
बदलाव फ़ितूर है ज़िंदगी का।।

दो सहेलियों की कहानी फगुनिया और लसुनिया
फगुनिया - क्यूँ रे सखी तू केवल घर में क्यूँ घुसी रहती है, बाहर निकला कर न।
लसुनिया - क्या करूँ बहिन ये कहीं जाने ही नहीं देते अदरक के पापा
फगुनिया - चल आज तुझे बाहर लेके चलती हूँ। बारिश की फुहार और सावन का मज़ा लेगी तो अलग महसूस करेगी।
(दोनों बाहर जाती हैं)
लसुनिया - सच में आज तो मज़ा आ गया। ऐसा लग रहा है मानो सब तरोताज़ा महसूस कर रही हूँ।

ज़िंदगी में बदलाव ज़रूरी है। एक ही चीज़ करते-करते हम सब ऊब जाते हैं तो अपने हुनर को तराशते रहिये। बदलाव होता रहेगा तो जिंदगी में बोरियत महसूस नहीं होगी। sms का पालन करिये sanitiser, mask और social distancing घर रहिये। स्वस्थ रहिये और परिवार का ख़्याल रखिये।
©® जितेन्द्र विजयश्री पाण्डेय 'जीत' मिर्ज़ापुर-प्रयागराज उत्तर प्रदेश
टीम बदलाव मंच
अनोखी लिखित सह वीडियो प्रतियोगिता

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