गुरुवार, 23 जुलाई 2020

तेरी चाहत में जीता हूँ तेरे ही शान में मारने कीहसरत का मतवाला।।

तेरी चाहत में जीता हूँ 
तेरे ही शान में मारने की
हसरत का मतवाला।।

आन हैं जमी आसमान है
जिंदगी जान है ।
अस्मत ईमान है तुझे क्या नाम दूं
तिरंगा कहूँ या धन्य धरती का
आँचल मान तिरंगा।।

तू जननी की जिस्म 
तेरा लिबास कफ़न जन्नत का
ओहदा ।

सर पे बांधे तेरी चाहत
कस्मे वादे वतन के जाबांज
कुर्बान का जज्बा।।

तेरा शानी नहीं दूजा 
तू जिन्दंगी में सबसे अहम सजदा
सुबह  सूरज निकलते ही
शाम सूरज ढलते ही  नीद में हूँ या जागू।
जिंदगी के ख्वाबों में तू ही संकल्प
पूजा।।

तू  रंगरेज की रंगी नहीं गज
दो गज कपड़ा।
मातृभूमि  की नाज़ का उपहार
नहीं दूजा।।

रंग बसंती चोले का केशरिया
बाना केशरिया रंग तेरा वतन
के दिल जिगर जान का पहचान
है जाना।।

तू इश्क है सरहदों के रखवालो
की चाहता है तेरी दीवानगी में
मिट जाना।।

तेरे ही साथ पहली आखरी सांस
लेता है तेरे ही सामने सर झुकता
वन्देमातरं जन गण मन की मस्ती
का है गाना तरन्नुम तराना।।

हरा है रूप तेरा चलते खुशहाल
जीवन का उद्भभव उत्थान ऊंचाई
आसमान ने माना।।

कर्म की क्रांति हरियाली खुशहाली
के बयारों में लहराता इतराता भारत का भाष्य तिरंगा नाम है
प्यारा ।।

अमन  शांति का पैगांम श्वेत
उज्वलाम सुफळांम मलयति
शीतलाम् माँ की आँचल की ममता मानवता का संसार का
सार सहारा।।

तूने नहीं सिखाया व्यर्थ उलझना
कोई ललकारता तेरी दीक्षा है
लड़ना।।

काल  की निरंतर धारा 
चक्र समय काल को तूने खुद
में उतारा अशोका के सिंह की
दहाड़ का नित्य निरंतर चक्र है
न्यारा।।

 चक्र सुदर्शन नारायण का 
न्याय दंड का आत्म 
साथ का आचरण संस्कार
तुम्हारा।।

आसमान में लहराते माँ
भारती की संतानो को
जागृत करते इतराते 
नमन प्रणाम करता है
पीताम्बर संग माँ भारती
का जन सारा।।

जननी जन्मभूमि की गरिमा
गौरव गाथा की अमिट पहचान।

 वर्तमान कि हर चुनौती से
लड़ने की ताकत तन मन की
हसरत हस्ती का भान तिरंगा
वतन मर्यादा मान तिरंगा।

नन्द लाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर

Badlavmanch

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