गुरुवार, 16 जुलाई 2020

भारत व चीन सम्बंध गद्य लेख प्रतियोगिता

भारत व चीन का सम्बंध।

साँप को दूध पिलाओ तो भी बच के रहना चाहिये। उसका भरोसा करना मुश्किल था होता है क्योंकि वह कब डंक मार जहर फैला दे कोई पता नही। यही बात चीन पे सही बैठता है क्योकि उसपर भरोसा करना ख़ुदको खतरे में डालना है या स्वयं का सर्वनाश करना है। क्योंकि चीन उस साँप से लाखों गुना खतरनाक है। इसका कारण उसका विस्तारवादी नीति है जिस कारण आज वर्तमान में विस्व लगभग 80% से अधिक उसके दुश्मन बन चुके है जिसका वर्तमान में  मुख्य कारण कोविद19 है। इसके साथ ही चीन भारत के पड़ोसी देशों में से एक ऐसा देश है। जो पाकिस्तान के आतंकियों को अपने आड़ लेकर भारत के साथ दोस्ती में दुश्मनी अर्थात पीठ में छुड़ा भोकने का का काम करता रहा है। यदि चीन के साथ सम्बन्ध की बात करे तो सैकड़ो साल हजारों साल पुराना है। भारत जहाँ से बुद्ध ने चीन की संस्कृति को राह दिखाया किन्तु वह भारत के महानता को भूल गया है जो उसके विनाश का कारण बनेगा। भारत व चीन का सम्बंध को यदि हम बाँटे तो उसे मुख्यतः समयानुसार दो भागों में बाँट सकते है।
आजादी से पहले व आजादी के बाद। आजादी से पूर्व भारत व चीन के सम्बंध बहुत मजबूत थे क्योंकि भारत के हथकरघा का भारी मात्रा में निर्माण होता था जो चीन में बेचा जाता था।
अर्थात भारी मात्रा में भारत व चीन के मध्य व्यापार होता था।
इसके साथ भारत व चीन के मध्य समाजिक संस्कृति व अन्य बहुत से बेहत सम्बंध होने में दोनों के मध्य बहुत गहरे रिश्ते थे।आजादी के बाद पहले प्रधानमंत्री व चीन के नेताओं के मध्य अटूट रिस्ते थे उस समय तो हिंदी चीनी भाई भाई का नारा भी दिया गया था। किन्तु चंद समय के बाद यह नारा गलत साबित हुआ जिसका कारण चीन था। चीन ने भारत के साथ धोखेबाजी किया अन्य शब्दों में कहे तो उस समय चीन ने कहा था कि वह कभी भारत पे कभी हमला नही करेगा। किन्तु अचानक से 1962 में हमला कर दिया,जिसमे गलत रणनीति के बजह से भारत की दुर्भाग्यपूर्ण हार हुई। लेकिन उसके बाद से भारत ने सभी क्षेत्रों में प्रगति की आज हाल के दशकों में खाशकर भारत के अचानक से विकास के रफ़्तार देखकर चीन को फूटी आँख नही भा रहा है जिसके वजह से वह समय समय पर विभिन्न चाल के द्वारा भारत के विकास के पथ पे बढ़कर विस्व के महाशक्ति बनने से रोकना चाहता है।जिस कारण से 2017 में भी भारत के साथ सीमा विवाद को उलझाने के लिये डोकलाम में अपने pla पार्टी के सेनाओं को डोकलाम पर हाथापाई के करने व उकसाने की कोशिश किया था इसका मुँहतोड़ जवाब मिला जिसका श्रेय भारत के जाबाज सैनिक व भारत के उस समय के विदेशमंत्री सुषमा स्वराज के नीति व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चक्रव्यूह को जाता है जिसने चीन के तरकीबों पे पानी फेर दिया। उसके बाद फिरसे उसने लद्दाख में हमारे निहत्थे सैनिको पे सोचसमझी साजिस के द्वारा आक्रमण करके कोशिश किये किन्तु भारत के महान सपूतों ने उन विषमताओं में भी दुगुने लगभग 40 से 45 उनके नापाक काययर सैनिकों को जहन्नुम पहुँचा दिया व फिरसे चीन के साथ पाकिस्तान को भी चेता दिया। हमें नाज है अपने वीरों पे। उसके बाद उसके नापाक इरादा को लेकर पूरे विस्व में चीन की थू थू हो रही है। हाल ही में अभी हमारे मुखिया मोदी जी के प्रयास से फिरसे चीन घुटने के बल आ गया। भारत के सैन्यनीति  व कूटनीतिक व बाजार नीति से चीन को बहुत भयानक धक्का लगा है। उसके ऑनलाइन अप्प में 59 अप्प को बंद कर उसे चारे खाने चित कर दिया है।
जिसमें टिकटोक भी शामिल है। इसके साथ साथ चीन के सामानों का भी द्वार बंद कर दिया गया है जिसकी सुरुआत हो चुकी है। इसके साथ साथ नए आत्मनिर्भर भारत अभियान से उसके पँख जलने लगे है। उसे उल्टे भागने पे मजबूर कर दिया है। धन्य है जवान व भारत के युवा। 
अंत में मैं चार पंक्ति के साथ चीन को कहना चाहूँगा कि

अब तो बदल जा चीन वरना भारत के वीर
अपने पे आ गए तो सुला देगी तुझे मौत के नींद। 
इसलिए गुरु को गुरु ही रहने दे। 
अपना दुश्मन बनाने की मत कर जिद्द।।

अन्यथा तेरे आँख निकाल लेंगे।
जैसे आंखे नोच खाता है गिध्द।।

अतः अब भी समय शेष है चीन खबरदार हो। सम्हल जाये तो अच्छा है।

स्वरचित रचना 

प्रकाश कुमार 
मधुबनी,बिहार
9560205841

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