गुरुवार, 23 जुलाई 2020

मेरी दुनिया की आखरी शाम!

💝मेरी दुनिया की आखरी शाम!💝

 सूरज चमकेगा रोज गगन पर,
       जग आलोकित करता रहेगा।
सब अनवरत ही चलता रहेगा,
होगी बातें भी जिन्दगी में तमाम।
      चमकेंगे चाँद सूरज की तरह हमेशा,
      अपनी सीमा पर वतन के रखवाले।
जिनके होठ हर वक्त ये कहते है !
मेरी शान भारत-माता तुझें सलाम!
      इस देश के नाम होगी कुर्बान मेरी जान,
       वहीं होगी" मेरी दुनिया की आखरी शाम!
झुके सर सजदे में उनके हमेशा हमारा,
भारत माँ के अमर शहीदों को प्रणाम!
     छोड़ घर में बूढ़े माँ-बाप वीवी-बच्चों को,
       देते सुरक्षा ,सुकून भरी नींद और आराम!
नींद-चैन गवां रहते सुरक्षा में हरवक्त तैनात,
आंधी हो तूफान या हो कठिन बर्फीली शाम।
      जान हथेली पर रख चौकन्ने रहते दुश्मनों से,
        देश की सेवा में,चैनों-सुकून करते हराम।
सोचते हमेशा कौन जाने कब कहाँ कैसे ?
हो जाये ,मेरी दुनिया की आखरी शाम!
      होठो पे रहता उनके"जय हिंद जय भारत
        बड़े ही जोश में कहते"माँ तुझें सलाम"!
ये भारत माता के सच्चे सपूत हमारे,
खुदी राम बोस, भगत सिंह चंद्रशेखर आजाद,
होगी ,नही कभी, इनकी जिन्दगी की आखरी शाम।
     ऐसे चमकें हमेशा जैसे हो सूरज,चाँद सितारें,
      हम करते है अपने देश के शूरवीरो को सलाम!


🎂समाप्त🎂 स्वरचित और मौलिक
                     सर्वाधिकार सुरक्षित
लेखिका :-शशिलता पाण्डेय

   

Badlavmanch

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