गुरुवार, 25 फ़रवरी 2021

नन्दलाल मणि जी त्रिपाठी पीताम्बर जी द्वारा#वक्त को जान इंसान#

वक्त को जान इंसान
मत जाया होने दे 
कर  वक्त कद्र बन कद्रदान
वक्त के  इम्तेहान से
ना हो परेशान।।
वक्त को जो जानता पहचानता
वक्त के लम्हो को संजीदगी
से जीता गुजरता 
वक्त उसको देता तख्त ताज की 
सौगात अरमानो की अविनि आकाश।।
वक्त का लम्हा लम्हा कीमती
दामन दिन ईमान कहता है
गीता कुरान वक्त पे मत
तोहमत लगा वक्त संग 
साथ जीने वाले पर मेहरबान।।
सुरखुरु होता इंसान वक्त की
राह में खुद की चाह में मीट
जाने के बाद वक्त ही लिख देता
तकदीर इंसान बन जाता खुदा
भगवान।।
वक्त प्रवाह मौजो का उतार
चढ़ाव वक्त समंदर की लहरों
जैसा जिंदगी के मुसाफिर की
मंजिल मकसद का पैमाना माप।।
वक्त जानता पहचानता 
के कदमो के निशान खुद के तमाम
इम्तेहान से गुजरे इंसान सौंप देता
जहाँ का दींन ईमान।।
वक्त काट मत क्योकि
वक्त तो कटता नही तू खुद
कट जाएगा जिंदगी की शाम
से पहले ही किनारे लग जायेगा
गुमनामी के आंधेरो में खो जाएगा
सिर्फ भुला देने वाला रह जाएगा
नाम अंजना अनजान।।
वक्त की नज़रों का  नूर
हाकिम हुज़ूर वक्त मेहरबान
कमजोर भी ताकतवर जर्रा भी
चट्टान वक्त के तीन नाम परसा
परसु परशुराम।।
नन्दलाल मणि  त्रिपाठी पीताम्बर

अनिल मोदी,जी द्वारा अद्वितीय रचना#जिंदगी दो पल की#

तिथि 05 - 02 - 2021
विषय है:- ज़िन्दगी मेंदो पल की
विधा गद्य / मुक्तक
व्यसन बुरा हर कोई कहता
पढ संदेश ध्रुमपान है वर्जित
छल्ले उडाते कश लगा लगा 
स्वस्थ जीवन में आग लगाता

शराब चरस गांजा हेरोइन बीडी तम्बाकु
पान पराग पान मसाला सेवित सुस्वादु
सरकार और विक्रेता हो रहे मालामाल
आम जनता लूटके हो रही है कंगाल

व्यसन शुरु होता है बुरी संगत से
कोई करे शौकिया कोई मजबूरी से
समय रहते जो चेत गये जीत जाते
 ना चेते खुद मर मर सबको मारते

अस्पताल के चक्कर काट कुंठा से भरते 
दवाई देखभाल में परिवार को डूबा देते
वेदना से तडफ कर शय्या में पडे रहते
ना सह पाते ना देख पाते ना कह पाते

अंत समय निकट जान ना सुमिरन कर पाते
बुरे व्यसन का अंत आँखो सामने देख रोते
कहते सभी से हाथ जोड व्यसन है बुरी बला 
सरकार इस पर रोक क्यों नहीं लगा पाते।

जितने भी व्यसन है सरकार तुरंत रोक लगाये
अमीर गरीब कोई भी हो स्वस्थ जीवन को पाये
सच्ची खुशहाली तब ही होगी देश मेरा स्वस्थ होगा
सारे जग में स्वस्थ तिरंगा हिन्दुस्तानी परचम होगा।

ये मेरी मौलिक रचना है और इसे प्रकाशन का आपको सर्वाधिकार है।
अनिल मोदी, चेन्नई3

रविवार, 21 फ़रवरी 2021

शशिलता पाण्डेय जी द्वारा अद्वितीय रचना#वो पेंटिंग#

🥀वो पेंटिंग🥀
**************
धरती के कैनवास पर, 
कुदरत ने तस्वीर उकेरी।
जगत की शोभा अति न्यारी।
भरा रंग उसमेँअनूठा अद्भुत,
तरुवर-पुष्प से धरा सौंदर्यपूरित।
रंगों से सजाया रंग-बिरंगे मौसम,
पतझड़ सावन शीत-बसन्त ग्रीष्म।
प्राकृतिक हर छटा बिखेरी,
कहीं बहते निर्झर की स्वरलहरी।
जहाँ पड़ती सूरज की किरणें सुनहरी,
धरा-पटल लगती पेड़-पौधों से हरी-भरी।
कुदरत निर्मित हर तस्वीर अनोखी,
 धरा के कैनवास की वो पेंटिंग जिसने देखी।
हुआ प्राकृतिक छटा का दीवाना,
ये चित्रकार कोई अद्भुत अनजाना।
रंग- बिरंगे सुन्दर पुष्पों से धरा सुसज्जित,
कभी बसन्त में लाल गुलमोहर से रक्तरंजित।
ये अनोखे रंग-बिरंगे प्राकृतिक चित्र,
देते नैनो को सुकून करते मन को तृप्त।
अनोखी अद्भुत कुदरत की जादूगरी,
सजी खूबसूरत तस्वीर से वसुन्धरा निखरी।
दिखती कहीं खूबसूरत हसीन वादियाँ,
कहीं अविरल बहती स्वर लहरी में नदियाँ।
 कहीं प्रखर अंशुमान सिंदूरी आभा-पूरित,
ये दृश्य अप्रतिम विहंगम परिलक्षित।
लदे-फदे से वृक्ष खड़े पुष्पज के अलंकारों से,
कहीं मौसम का रूप अनूठा बसंती बहारो से।
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स्वररचित और मौलिक
सर्वाधिकार सुरक्षित
कवयित्री:-शशिलता पाण्डेय
बलिया( उत्तर प्रदेश)

भास्कर सिंह माणिक कोंच जी द्वारा अद्वितीय रचना#गांव की माटी#

मंच को नमन
विषय - गांव की माटी
प्राणों से बढ़कर गांव की माटी।
पावन अतिथि स्वागत की परिपाटी।।

गंगा जल जैसे हैं निर्मल भाव
स्वर्ग से सुन्दर हैं पावन ठांव
अनवत प्रीति की सरि कल -कल करती
सबके हिय करता है शीतल गांव

अटल भीष्म जैसी रखता छाती।
प्राणों से बढ़कर गांव की माटी।।

सुख में दुख में मिल हंसते गाते
ईद दीवाली मिल साथ मनाते
न होते हैं वर्गवाद के झगड़े
गम का सागर हंसकर पी जाते

पंगडंडी गली प्रेम बर्षाती।
प्राणों से बढ़कर गांव की माटी।।

लहलहाते वृक्ष सुगंध लुटाते
माणिक सोना चांदी खेत उगाते
कभी ऊंच-नीच का भेद न करते

बढ़कर दुश्मन को भी गले लगाते

है भारत की माटी मेरी थाती ।
प्राणों से बढ़कर गांव की माटी।।

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मैं घोषणा करता हूं कि यह रचना मौलिक स्वरचित है
        भास्कर सिंह माणिक कोंच

वीना आडवानी जी द्वारा अद्वितीय रचना#डूबते को थाह मिलना#

डूबते को थाह मिलना
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कहते सभी विदुर /विधवा से  भूल जाओ जाने वालों को।।
पर कहां भूल पाता कोई भी
अपने सगे चाहने वालो को।।

सोचते सब कैसे ये भारी
जिंदगी अकेले काट पाऐंगे।
तभी सभी बड़ो की राय 
मिलती इनकी शादी फिर रचाऐंगे।।

ऐसे मे फिर दो जिंदगी मिल
सुख दुख अपना बांट जाऐंगे।
इस तरह एकदूजे का डूबे को
 सहारा देकर जख़्म सिल पाऐंगे।।

खुशी आऐगी फिर से इनकी 
जिंदगी मे ये बहार बन एकदूजे
को फिर से महकाऐंगे।।2।।

वीना आडवानी
नागपुर, महाराष्ट्र
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अनन्तराम चौबे अनन्त जी द्वारा विषय जन्मदिन सालगिरह का दिखावा पर खूबसूरत रचना#

जन्मदिन सालगिरह का दिखावा (लेख)
 रेलवे की 40 वर्षों की सेवा के बाद रिटायर होने के बाद मैंने साहित्य सेवा का लक्ष्य बनाया और उसी राह पर चल रहा हूं मंजिल का तो पता नहीं है जहां तक पहुंच गया हूं उससे संतुष्ट हूं । 50 वर्षों से साहित्य सेवा भी कर रहा हूं ।
 अब साहित्य सेवा करते हुए सम्मान मिल रहे हैं ये तो अच्छी बात है किसी को अच्छा न लगे ये उनकी सोच है ऐसे कुछ लोग  टोकते भी है रोड़े भी अटकाते है परंतु इससे भ्रमित न होकर अपनी साहित्य सेवा जारी है जैसे अर्जुन का लक्ष्य मछली की आंख भेदन करना था और उन्होंने किया क्योंकि उन्होंने अपनी एकाग्रता , ध्यान को सिर्फ आंख पर ही केन्द्रित किया था । फिर भी न मैं अर्जुन हूं  न उनकी कल्पना कर सकता हूं ।
  इसी फरवरी में मैं 70 वें वर्ष में प्रवेश करूंगा मगर मैंने अपना जन्मदिन या शादी की सालगिरह कभी नहीं मनाया न कभी सोचा 4/5 वर्षों से वाट्सएप मंचों से जुड़ा हूं कभी किसी मंच में नही बताया न मुझे शौक है । रही बात  किसी को बधाई शुभकामनाएं नहीं देता  हां मंचों में किसी को नहीं देता मंचों में प्रतिदिन किसी न किसी का जन्मदिन सालगिरह आता ही रहता है  मैं 100/125/ मंचों से व इससे ज्यादा पर्सनल लोगों से जुड़ा हूं  रोज यदि सब मंचों में बधाई शुभकामनाएं देता रहूं फिर तो साहित्य सेवा कर ही नही पाऊंगा कुछ पाने के लिए कुछ त्याग भी करना पड़ता है ऐसा बुजुर्गो से सुना है । 100 में से 99 काम सही करो और एक ग़लत हो जाये तो लोग बुराई करते ही हैं ।
मंचों पर लोग अपना जन्मदिन, सालगिरह तो डालते ही है  परिवार रिश्तेदारों के भी डालते हैं यदि समझदार हो तो ये सब साहित्य मंचों में नहीं डालना चाहिए मंच वाधित होते हैं दिन भर यही चलता रहता है कोई बुरा न मान जाएं मजबूरी में भेजते हैं अभी पिछले माह 2 जनवरी 2021 को मेरे बड़े भाई का स्वर्गवास हुआ है  15/16 दिन गांव में भी रहा शोक के समय परिवार का साथ दिया साथ में रहा विधिवत सब कार्य किये मगर मैंने इस दुख की खबर मंचों में नहीं डाली क्योंकि ये मेरा पारिवारिक  कार्यक्रम था ।
 हां परिवार में शोक होते हुए साहित्य कार्यक्रम जारी रखा भाई की मृत्यु पर कविता भी लिखी दिनांक 12/1/2021को स्वर्ण आभा पेपर श्रीगंगानगर राजस्थान में प्रकाशित भी हुई मंचों में आनलाइन कवि सम्मेलन किये विषय प्रतियोगिताओं में कविता लिखकर हिस्सा लिया प्रथम द्वितीय तृतीय स्थान भी मिला सम्मान भी मिले और जनवरी 2021 में मुझे (22) सम्मान भी मिले अब यदि जन्मदिन सालगिरह और शोक मनाता रहता तब क्या एक माह में (22) सम्मान क्या मुझे मिलते  समय निकल जाता जो दोबारा नहीं आता मेरी साहित्य सेवा भी प्रभावित होती ।
 कई मंच वालों को मिले सम्मान और प्रकाशित कविताएं मंचों में भेजने में आपत्ति होती यह तो साहित्य का ही अंग है साहित्य मंचों में नही भेजेंगे तो क्या बैंक में जमा करने को मिलते हैं कई मंचों ने इसी वजह से मुझे मंच से भी निकाल दिया मगर मैं अपने हिसाब से साहित्य सेवा करता हूं और करूंगा
 कई लोग बहाना करते हैं सम्मान  प्रकाशित कविताएं भेजने से मोबाइल बंद होता मगर उनका मोबाइल  जन्मदिन सालगिरह के चित्र भेजने से नही होता है इससे तो पूरे दिन मोबाइल भर जाता है जन्मदिन सालगिरह की बधाइयां मंचों में नही मनाना चाहिए जो हमदर्द है फोन से बधाई दो साहित्य मंचों को बाधित न करो।
 अब यदि मैं रहूं या न रहूं कोई मुझे कोई याद करें या न करें मेरी साहित्य सेवा और उससे मिली उपलब्धियां जरूर रहेगी ।
 किसी ने मुझे से प्रश्न किया 
प्रश्न.. केवल सम्मान, ना किसी के सुख ना किसी के दुख में भागीदार 
समय तो नहीं था मगर इसी बहाने यह लेख लिख गया
अब किसी को अच्छा लगे उसका भला हो जिसको बुरा लगे उसका भी भला हो ।
धन्यवाद
   अनन्तराम चौबे अनन्त
    जबलपुर म प्र 2778/
        4/2/2021

बाबूराम सिंह कवि जी द्वारा अद्वितीय रचना#गंगा#

ॅजयति-जयति जग पावनी गंगा
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शुचि सौभाग्य शुभ लावनी गंगा ।
जयति-जयति जग पावनी गंगा।।

जल पियूष सम अति गुणकारी।
लाई  लाज  सब   मिटै  बिमारी ।
नित   मंजन   स्नान    पान   से  ।
जीवन  बन  जाता   अविकारी।।

आगम  निगम  हो  जाता  चंगा ।
जयति-जयति जग पावनी गंगा।।

एक   बूंद  जल  से  ही  तेरे  ।
कट  जाते   माँ   नर्क  घनेरे ।
राज सर्व खुशियों का तुझमें ।
पाय   निहाल   होते  बहुतेरे ।।

माँ   तेरो  अति   सुचि  उत्संगा ।
जयति-जयति जग पावनी गंगा।।

दुर्गुण जन  मानस  से  हटाती ।
ताप - पाप अभिशाप मिटाती।।
बंधन काट  लख  चौरासी  का ।
जन -जन को बैकुण्ठ दिलाती।।
 
सब  पातक  पुंज नसावनी गंगा।
जयति-जयति जग पावनी गंगा।।

अनायास दरस -परस हो जाता।
माँ उसका भी उत्कर्ष हो जाता ।।
नाम उच्चारण चिन्तन मनन से।
भव  निधी   मानव   तर  जाता ।।

भस्मी  भूत   कर  भय  अभंगा  ।
जयति-जयति जग पावनी गंगा।।

साधु   सन्त   योगी  सन्यासी  ।
सेवत   हर  -हर  गंगे   काशी ।।
ब्रह्म कमंडल विष्णु चरण की।
हो  मईया  महा  पावन  राशी।।

प्रेरित     कर     देती    सत्संगा  ।
जयति-जयति जग पावनी गंगा।।

गीता  गायत्री   गंगा  गो  माता ।
शरण तिहारी  जो कोई  आता।।
प्रेम  श्रध्दा   विश्वास  आस  से ।
मनवांछित सब  कुछ पा जाता।।

रंग   माँ  "बाबूराम " निज   रंगा ।
जयति-जयति जग पावनी गंगा।।

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बाबूराम सिंह कवि 
ग्राम -बड़का खुटहाँ ,पोस्ट-विजयीपुर (भरपुरवा)
जिला-गोपालगंज (बिहार )
पिन-८४१५०८
मो०नं-९५७२१०५०३२
************************ *

रामबाबू शर्मा, राजस्थानी,दौसा(राज.)जी द्वरा अद्वितीय रचना#मेरा गाँव#

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                  कविता
                 *मेरा गांव*
                  ~~~~~
     संस्कारों की अनुपम संस्कृति,
     मनभावन प्यार लुटाती।
     सुख ही सुख मेरे गांव में,
     सबका वो मान बढ़ाती ।।

     सब मिल आपस में रहते,
     शुद्ध भावना परोपकारी।
     सुख ही सुख मेरे गांव में,
     जय हो भारत माता की।।

     धरा पुत्र है शान हमारी,
     सैनिक सच्चा हितकारी।
     सुख ही सुख मेरे गांव में,
     सब के सब आज्ञाकारी।।

     घी दूध दही की बातें,
     मनमोहक खुशबू आती।
     सुख ही सुख मेरे गांव में,
     चटनी की याद सताती।।

     मां के हाथों की रोटी,
     छप्पन भोग सी लगती है।
     सुख ही सुख मेरे गांव में,
     छाछ राबड़ी बनती है।।

      पर्यावरण अपना साथी,
      डाल-डाल पर पक्षी चहके।
      सुख ही सुख मेरे गांव में,
      हर घर हरियाली महके।।

      ©®
         रामबाबू शर्मा, राजस्थानी,दौसा(राज.)

छंद#प्रकाश कुमार मधुबनी'चंदन' जी द्वारा खूबसूरत रचना#


स्वरचित रचना
स्वरचित छंद

जिसने ये तन दिया मेरे लिए है हर क्षण जिया।
उस माता पिता को क्यों ना झुक के प्रणाम करू।
जिसके बिना कोई घर नही और हो यह धर नही।
उनके कहे पे क्यों ना मैं हर कठिन काम करू।
जिनके कर्ज को अभी तक ईश्वर भी ना चुका पाए
फिर क्यों ना मैं उनके शौर्यता का बखान करू
जिन्होने है चलना सिखाया, सदा ही बढना सिखाया।
उस माता पिता का क्यों ना मैं नित  गुणगान करू।

*प्रकाश कुमार मधुबनी'चंदन'*

नांदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर जी द्वारा अद्वितीय रचना#वक्त की बात#

वक्त की क्या बात
अच्छों अच्छो की
दिखा देता औकात
पल भर में रजा रंक
फकीर वक्त की तस्वीर।।
वक्त किसी का गुलाम नही
वक्त संग या साथ नही
वक्त किसी का शत्रु मित्र नही
वक्त तो भाग्य भगवान् फकीर।।
वक्त दीखता नही दामन में
सिमटता नही आग में जलता नही
सागर की गहराई में डूबता नही वक्त कायनात का राहगीर।।
समय काल आवर दिवस माह
वर्ष युगों युगों से अपनी गति
चाल के संग भूत् वर्तमान अतीत।।
वक्त तारीख का पन्ना नही
वक्त तारीख का पन्ना सिर्फ
कायनात की यादों की जमीन।।
वक्त रुकता नही चलता जाता
लाख जतन कर ले कोई लौट
कर नही आता वक्त जज्बा जमीर।।
वक्त के अपने रंग रूप
कही दिखता है चमन बहार में
खुशियों की कायनात में प्रेम मुस्कान में वक्त ही करम करिश्मा तकदीर।।
वक्त आसुओं की धार विरह
वियोग संजोग मिलन जुदाई
वक्त रिश्तों की डोर का छोर
वक्त कब्रिस्तान श्मशान वफ़ा
बावफ़ा बेवफाई।।
वक्त किस्मत वक्त काबिलियत
वक्त सस्ता वक्त महंगा वक्त जख्म
वक्त मरहम वक्त मजबूर वक्त मशहूर वक्त खुदा खुदाई।।
वक्त जागीर नही वक्त जागीर का
जन्म दाता हद हैसियत बनाता मिटाता वक्त आग वक्त ओस 
वक्त शोला आग रुसवाई।।
वक्त औकात वक्त ताकत
वक्त कमजोर की हिमाकत
वक्त अर्थ को अर्थहीन 
बेमोल को बेशकीमती बानाता
वक्त से ही नाम बदनाम
वक्त ना दोस्त ना भाई ।।
वक्त नही बदलता बदलता
सिर्फ वक्त का मिज़ाज़ वक्त
मौसम  चोली दामन का
साथ वक्त बेरबम हरज़ाई।।
वक्त  मजलूम
वक्त ही दिखाता हर दर द्वार
वक्त को कोई पार न पाया
वक्त ना अपना पराया वक्त
शौर्य समशीर।।
 वक्त वाकया वक्त फ़साना
अफ़साना वक्त कीमती
वक्त दुनियां की दौलत
वक्त गवाह वक्त गुनाह 
वक्त मुज़रिम वक्त मजलिस
वक्त मुंसिफ मुसाफिर बाज़
दगाबाज़ मौका मतलब धोखा
सौदा सौदाई।।

नांदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर

गीता पाण्डेय अपराजिता जी द्वारा खूबसूरत रचना#मनमीत#

शीर्षक:--मनमीत
××××××××××××××
सॉसों का है घरौंदा,
आबाद जिन्दगी है,
मनमीत तुमको पाकर,
खुशहाल जिन्दगी है ।1।

गुजरे थे हम जहाँ से,
ख्वाबों का था शहर ,
अफसोस हमने सोचा,
बरबाद जिन्दगी है ।2।

मिलते न गर मुझे तुम,
मंजिल कभी न मिलती ,
हाथों में  हाथ  तेरा ,
अलमस्त जिन्दगी है ।3।

चाहत हर एक लम्हा,
हो खुशनसीब सबका,
जिसकी दुआ मिली है,
मेरे दिल की बन्दगी है।4।

जब-जब लगी है ठोकर,
अपनों  के  पॉव  थे ,
गैरों का था सहारा,
हॅसती ये जिन्दगी है ।5।

देती  रही  नसीहत ,
गीता को सारी दुनिया,
चल कर मुकाम हासिल,
मुकम्मल ये जिन्दगी है ।6।

गीता पाण्डेय अपराजिता
रायबरेली (उ0प्र0)

फिरसे हवा चलने लगी है#प्रकाश कुमार मधुबनी'चंदन' जी द्वारा अद्वितीय रचना#



स्वरचित रचना
फिरसे हवा चलने लगी है
 
फिर से हवा चलने लगी है।
फिरसे दवा मिलने लगी है।
कई ऐसे रोग है बहुत पुराने।
जिस पे बाकी है मल्हम लगाने।

किन्तु काफी समय बाद सही फिर 
लोगों में चहलकदमी होने लगी है।
कुछ कम ही सही कोई बात नही
किन्तु मनोकामना पूरी होने लगी है।।

यू तो कई विद्यालय खुल गए है 
और अब कई खुलने बाकी है।
कुछ घर में चिराग़ जलने लगा है।
कुछ घर में अब भी वैसे उदासी है।।

फिर भी जो भी हो सुकन मिलता है।
जो बाजार में रौनक बढ़ने लगी है।
जानें कितने महीनों बाद फिरसे अब।
निराशाओं में आशा की किरण जगी है।।

कौन क्या बोला किसने क्या किया।
उन बातों का काला चिट्ठा अब भी है।
मौन होकर भी सारा हिसाब कर चुके है।
फिरभी कुछ काला चिट्ठा पढ़ना अब भी है। 

कुछ चिड़िया कैद है अब भी पिंजड़े में।
कुछ चिड़िया नील गगन में उड़ने लगी है।
कुछ तो इंतजार कर रहे है निकलने को।
फिरभी कुछ औरते घूँघट खोल बढ़ने लगी है।

*प्रकाश कुमार मधुबनी'चंदन'*

गुरुवार, 18 फ़रवरी 2021

बदलाव मंच व  ए1लिबर्टी अकेडमी के द्वारा भव्य सरस्वती पूजन व राष्ट्रीय  काव्य संध्या का आयोजन।

बदलाव मंच व  ए1लिबर्टी अकेडमी के द्वारा भव्य सरस्वती पूजन व राष्ट्रीय  काव्य संध्या का आयोजन।

दिल्ली।राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बदलाव मंच संस्थापक सह मार्गदर्शक दीपक क्रांति व अध्यक्षा रूपा व्यास ने बताया कि बदलाव मंच के बैनर तले ए1 लिबर्टी के एकेडमी द्वारा
दिल्ली के संगम विहार नई दिल्ली110080 में बसंत पँचमी के अवसर पर भव्य सरस्वती पूजन सह राष्ट्रीय काव्य संध्या का आयोजन किया गया , जिसमें ए1 वन लिबर्टी अकेडमी( कोचिंग )के संचालक तथा विकास कुमार, प्रकाश कुमार मधुबनी 'चंदन',सुनील चौधरी जी,विपुल चौधरी जी,दीपक जैन जी,राजेश कुमार साहू जी,कार्यक्रम अध्यक्ष
तथा अन्य सहयोगी मिलकर किया।यह कार्यक्रम  16 फरवरी2021 बसंत पंचमी को दिल्ली के संगम विहार स्थित तिरँगा चौक पर स्थित संस्थान के बाहर बड़े धूमधाम से मनाया गया। जिसमें बदलाव मंच के तरफ से बच्चों को व आने वाले आसपास के कवियों को सम्मान-पत्र दिया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों में  श्री रमेश विधुड़ी, सांसद, दक्षिणी दिल्ली ,डॉ.प्रेमी सिंह, डॉ.मन्जु शर्मा
एसोसिएट प्रोफ़ेसर हिन्दी
दिल्ली विश्वविद्यालय दिल्ली,
विशिष्ट अतिथि,विशेष अतिथि एल. एस तोमर जी,एसोसिएट प्रोफसर, मुरादाबाद, यू पी,
,चंचल हरेंद्र वशिष्ट
आर.के.पुरम,नई दिल्ली
अतिथि कवयित्री,एन.के.सरस्वती 'नरसी' ,जयपुर(राजस्थान),संजय मीणा(करौली, राजस्थान)
अतिथि कवि,डॉ.सत्यम भास्कर व बाल कलाकारा माहिका मिश्र भी
सम्मिलित थे। इस कार्यक्रम के संयोजन में मुख्य मार्गदर्शक के  रूप में बदलाव मंच,राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक संस्था  के संस्थापक  अध्यक्ष दीपक क्रांति जी व अध्यक्षा रूपा व्यास कार्य जी कर रहे हैं। संस्था के पदाधिकारियों का मानना है इससे समाज में आगे आने वाले पीढ़ी को आगे बढ़ने का मनोबल मिलेगा। ए1 लिबर्टी के प्रमुख विकास कुमार ने साहित्यिक संस्था को मार्गदर्शन करने व शुभकामनाएं हेतु आभार व्यक्त किया है। प्रमुख रूप से बच्चे आकाश,प्रसांत,इरशाद,लक्की व अन्य सभी बहुत उत्साहित थे।इसमें दिल्ली में रहने वाले साहित्यकारो को आमंत्रित किया गया साथ ही सभी को सम्मान-पत्र व शॉल भेंट कर सम्मानित भी किया गया। मुख्य आयोजक व संचालक लिबर्टी अकादेमी के विकास कुमार, व बदलाव मंच के  प्रकाश मधुबनी थे।
   साथ ही कार्यक्रम के लिए रूपक क्रांति,अध्यक्ष,बदलाव मंच 'ट्रस्ट',मुमताज हसन,राष्ट्रीय सलाहकार एल.एस.तोमर चाणक्य,नंदिता रवि चौहान व रूपेश क्रांति आदि ने शुभकामनाएं दी हैं।
      ब.म.अभिभावक संरक्षक सुनील दत्त मिश्रा,शोभा किरण ,संरक्षक संतोष महतो,राहुल गुप्ता, मुबारक आलम,  अभिषेक कुमार झारखंड, विवेक साह,झारखण्ड सचिव,राहुल गुप्ता,राष्ट्रीय सचिव रजनी शर्मा चंदा,भास्कर सिंह माणिक कोंच,गीता पाण्डेय,डॉ.रेखा मंडलोई 'गंगा',बंसीधर शिवहरे,रमेश चन्द्र भाट,सतीश लाखोटिया,शालिनी सिंह,चन्द्र प्रकाश गुप्त चन्द्र,कृष्णा सेंदल तेजस्वी,प्रियंका साव,बाबूराम सिंह, विशाल चतुर्वेदी "उमेश",आई टी अध्यक्ष लेफ्टिनेंट पुष्कर शुक्ला,,सोशल मीडिया प्रभारी जितेंद्र विजयश्री 'जीत',स्वप्निल जैन,नंदन मिश्र,डॉ सुनील परीट,डॉ वसुधा कामत,डॉ मलकप्पा अलियास 'महेश',अर्चना फौजदार आदि ने सभी सम्मिलित प्रतिभागियों एवं अतिथियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दी।

स्वप्निल जैन(छिन्दवाड़ा) जी द्वारा खूबसूरत रचना#

अ.रा.ब.मं को नमन।
शीर्षक: युवा देशभक्त।
दिनांक: 28/01/2021
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लहू वीर का मिट्टी में जब मिलता है
तब भारत माँ की आंखों से अश्रु बहता है।

भारत का हर युवा इस धरती को माता मान रहा
माँ की आंखों में अश्रु धारा देख 
सबके सीनों में लहू उबाल रहा।

हिन्दुस्तान की पावन धरती पर 
जो आंख दिखलायेगा
चाहे वो चीन या पाकिस्तान कहायेगा।
याद दिलादू लहू गर्म हैं
भारत का हर युवा 
तुम्हारे घर में घुसकर
नानी याद दिलायेगा।

भारत माँ ने संस्कार दिये
शीश ये हर दम झुकता है
भारत से संस्कार मिला है
हर युवा संस्कृति का सम्मान रखता है

पर याद दिलादू
उंगली जो उठे मात पर
रहा ना हमसे जाएगा
उसी दिन शीश काट कर
हाथ में रख दिया जायेगा
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स्वरचित एवं मौलिक रचना:
स्वप्निल जैन(छिन्दवाड़ा)

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बदलाव मंच के निःशुल्क शिक्षण संस्थान का उद्घाटन


बदलाव मंच के निःशुल्क शिक्षण संस्थान का उद्घाटन

चंदवा। मंगलवार प्रखंड के लुकुईया गांव स्थित बदलाव मंच संस्था द्वारा संचालित निःशुल्क शिक्षा केन्द्र का उद्घाटन पुनि सह थाना प्रभारी ने किया। समारोह को संबोधित करते हुए थाना प्रभारी ने कहा कि गांव स्तर पर इस तरह के केंद्र का खुलना बहुत ही सराहनीय पहल है। जब गांव के बच्चे शिक्षित होंगे तभी गांवों का विकास होगा और आने वाली पीढ़ी गलत राह पर चलने से बचेगी।संस्था के झारखण्ड अध्यक्ष रूपक क्रांति ने बताया कि रोज़ सुबह 6 से 9 बजे तक सरकारी स्कूल के बच्चों को नवोदय की तैयारी करवाई जाएगी।10 बजे से 1 बजे तक बाकी विद्यार्थियों को पढ़ाया जाएगा।पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को कंप्यूटर का भी ज्ञान दिया जाएगा। ये सभी शिक्षाएं विद्यार्थियों को संस्था की  तरफ से निःशुल्क दी जाएगी। इस सराहनीय पहल पर अंतरराष्ट्रीय बदलाव मंच के संस्थापक सह मार्गदर्शक दीपक क्रांति,अध्यक्षा रूपा व्यास,राष्ट्रीय सलाहकार एल.एस तोमर चाणक्य,नन्दिता रवि चौहान ने भी सभी को बधाई व शुभकामनाएं दीं । आगे हर संभव मदद करने का वचन दिया और बताया कि शैक्षिक बदलाव लाने के लिए भारत के कोने-कोने में यह कार्य बदलाव मंच द्वारा आगे किया जायेगा..  मौके पर संस्था के रूपक क्रांति,बुधन गंझु,सबीना नाग,रूपेश क्रांति,अमित लकड़ा समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे।
     ब.म.अभिभावक संरक्षक सुनील दत्त मिश्रा,प्रकाश कुमार मधुबनी,डॉ. सत्यम भास्कर,शोभा किरण ,संरक्षक संतोष महतो,राहुल गुप्ता, मुबारक आलम,  अभिषेक कुमार झारखंड, विवेक साह,झारखण्ड सचिव,राहुल गुप्ता,राष्ट्रीय सचिव रजनी शर्मा चंदा,भास्कर सिंह माणिक कोंच,गीता पाण्डेय,डॉ.रेखा मंडलोई 'गंगा',बंसीधर शिवहरे,रमेश चन्द्र भाट,सतीश लाखोटिया,शालिनी सिंह,चन्द्र प्रकाश गुप्त चन्द्र,कृष्णा सेंदल तेजस्वी,प्रियंका साव,बाबूराम सिंह, विशाल चतुर्वेदी "उमेश",आई टी अध्यक्ष लेफ्टिनेंट पुष्कर शुक्ला,,सोशल मीडिया प्रभारी जितेंद्र विजयश्री 'जीत',स्वप्निल जैन,नंदन मिश्र,डॉ सुनील परीट,डॉ वसुधा कामत,डॉ मलकप्पा अलियास 'महेश',अर्चना फौजदार आदि ने सभी सम्मिलित प्रतिभागियों एवं अतिथियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दी।